अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैलता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इसी बीच, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के खिलाफ सऊदी अरब ने भी सैन्य कार्रवाई तेज करते हुए यमन में उनके ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने मध्य-पूर्व में व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका को और गहरा कर दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका की ओर से किए गए सैन्य हमलों के जवाब में मिसाइल और ड्रोन हमलों का सहारा लिया। ईरानी हमलों का निशाना क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान बने। बहरीन, कुवैत, इराक और अन्य खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के कारण इन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ईरान का कहना है कि उसकी कार्रवाई अमेरिकी हमलों का जवाब है, जबकि अमेरिका का दावा है कि उसके सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता और अमेरिकी सैनिकों तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा पैदा करने वाले ठिकानों को कमजोर करना है।
इस बीच यमन में ईरान समर्थित हूती संगठन के खिलाफ सऊदी अरब की कार्रवाई ने तनाव को और बढ़ा दिया है। हूती विद्रोहियों की ओर से लाल सागर में जहाजों और समुद्री परिवहन को निशाना बनाए जाने की धमकियों के बाद सऊदी अरब ने यमन में हूती ठिकानों पर बमबारी की। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। इस क्षेत्र से होकर तेल और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय आवाजाही होती है।
मध्य-पूर्व संकट का असर दुनिया के दो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों—होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब—पर दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के कारण होर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ी है, जबकि हूती गतिविधियों के चलते लाल सागर और बाब-अल-मंदेब मार्ग भी जोखिमपूर्ण हो गया है। यदि इन समुद्री मार्गों पर लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन, बीमा लागत और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। हालिया घटनाक्रम के बीच तेल की कीमतों में तेज उछाल की खबरें भी सामने आई हैं।
अमेरिका ने ईरान और हूती संगठन को कड़ी चेतावनी दी है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि अमेरिकी सैनिकों और समुद्री मार्गों पर होने वाले हमलों का जवाब सैन्य कार्रवाई के जरिए दिया जाएगा। दूसरी ओर, ईरान ने भी स्पष्ट संकेत दिया है कि अमेरिकी हमलों के जवाब में वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी ठिकानों को निशाना बना सकता है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ती बयानबाजी और सैन्य कार्रवाई ने तनाव कम करने के कूटनीतिक प्रयासों को भी चुनौती दी है।
मौजूदा घटनाक्रम ने इस आशंका को मजबूत कर दिया है कि मध्य-पूर्व का संघर्ष और अधिक देशों को अपनी चपेट में ले सकता है। ईरान और अमेरिका के बीच सीधा टकराव, यमन में हूती गतिविधियां और सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई अब एक-दूसरे से जुड़ती दिखाई दे रही हैं। इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियां तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाती हैं या फिर सैन्य कार्रवाई का सिलसिला और तेज होता है।




