PM मोदी ने जताया भरोसा, प्रह्लाद जोशी बोले- पूरी निष्ठा से निभाऊंगा शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि वह इस दायित्व को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन पर जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरना उनकी प्राथमिकता होगी।

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का प्रभार भी सौंपा गया है। यह बदलाव 25 जुलाई 2026 को किया गया। आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि जोशी फिलहाल अपने मौजूदा मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालते हुए शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार देखेंगे।

नई जिम्मेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वह शिक्षा मंत्रालय का दायित्व कर्तव्य और विनम्रता की भावना के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि वह पूरी क्षमता और ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करेंगे। जोशी के बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि वह प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे।

प्रह्लाद जोशी ने अपने पूर्ववर्ती धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की भी सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रधान के प्रयासों का उल्लेख किया। जोशी ने संकेत दिया कि वह मंत्रालय में पहले से चल रहे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और नीतिगत पहलों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे समय में उनके पास आई है, जब देश में परीक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और छात्रों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में हैं।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ है, जब शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर देश में व्यापक राजनीतिक बहस चल रही है। आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और इसके बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया। इस बदलाव को सरकार के लिए शिक्षा क्षेत्र में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार में लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और केंद्र सरकार में पहले भी कई अहम मंत्रालयों का कार्यभार संभाल चुके हैं। उनकी प्रशासनिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपे जाने को एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब उनके सामने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर काम करने की चुनौती होगी, जिनमें परीक्षा प्रणाली में भरोसा कायम करना, छात्रों की चिंताओं को दूर करना और शिक्षा सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करना प्रमुख हैं।

शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों के बीच विश्वास को मजबूत करना होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठने वाले सवालों, परीक्षा संचालन में पारदर्शिता और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मंत्रालय को कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेने होंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को जमीन पर लागू करना भी सरकार के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेगा।

राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस बदलाव को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शिक्षा मंत्रालय देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं से सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे में प्रह्लाद जोशी के सामने एक ओर मंत्रालय के मौजूदा कार्यक्रमों को जारी रखने की जिम्मेदारी होगी, वहीं दूसरी ओर छात्रों की अपेक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों पर प्रभावी प्रतिक्रिया देने की चुनौती भी होगी। अपनी पहली प्रतिक्रिया में उन्होंने जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए पूरी निष्ठा से जिम्मेदारी निभाने की बात कही है, उससे साफ है कि वह इस नए दायित्व को गंभीरता से ले रहे हैं।

अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि प्रह्लाद जोशी शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के बाद किन प्राथमिकताओं पर सबसे पहले काम करते हैं। परीक्षा सुधार, छात्रों की शिकायतों का समाधान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आने वाले समय में उनके कार्यकाल के प्रमुख मुद्दे हो सकते हैं। फिलहाल, उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है और सरकार की ओर से आगे की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर निर्णय बाद में लिया जा सकता है।

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