जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़े कथित विदेशी फंडिंग मामले की जांच ने अब नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों ने इस मामले में अपनी कार्रवाई तेज करते हुए पांच कंपनियों को जांच के दायरे में लिया है। शुरुआती जांच में इन कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और आंदोलन से जुड़े संभावित आर्थिक संबंधों की पड़ताल की जा रही है। इसी क्रम में दिल्ली समेत चार शहरों में एक साथ छापेमारी की गई, जहां से कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय साक्ष्य जब्त किए गए हैं। एजेंसियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रदर्शन के आयोजन, प्रतिभागियों की यात्रा, आवास, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए धन कहां से आया तथा क्या इसमें किसी विदेशी स्रोत से प्राप्त धन का इस्तेमाल किया गया।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल वित्तीय दस्तावेजों, बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और कंपनियों के बीच हुए लेन-देन का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है, ताकि धन के प्रवाह और उससे जुड़े नेटवर्क का पता लगाया जा सके। एजेंसियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल जिन पांच कंपनियों को जांच के दायरे में लिया गया है, उनके नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
केंद्र सरकार पहले भी सर्वोच्च न्यायालय में यह स्पष्ट कर चुकी है कि आंदोलन से जुड़े कथित विदेशी फंडिंग के पहलुओं की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं। सरकार का कहना है कि यदि किसी संगठन, कंपनी या व्यक्ति ने विदेशी धन का उपयोग निर्धारित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए किया है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह भी कहना है कि विदेशी अंशदान से जुड़े नियम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं तथा किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
दूसरी ओर, CJP और उससे जुड़े प्रतिनिधियों ने विदेशी फंडिंग के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। संगठन का दावा है कि आंदोलन पूरी तरह जनसहयोग और स्वैच्छिक योगदान के आधार पर संचालित किया गया तथा उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। संगठन ने यह भी कहा है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेगा और आवश्यकता पड़ने पर सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक दस्तावेज उपलब्ध कराएगा।
उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर पर आयोजित यह प्रदर्शन परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। आंदोलन के बाद इसके वित्तीय स्रोतों को लेकर उठे सवालों के बीच जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। हालांकि अब तक किसी भी कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित विदेशी फंडिंग के आरोपों में कितना तथ्य है और क्या इस मामले में किसी कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता बनती है।




