झारखंड में सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार 11वें दिन भी जारी है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी धरने पर बैठे हैं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में सामने आ रहे विवादों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है, इसलिए केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है। छात्रों की मांग है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए, दोषियों को सख्त सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं।
इधर राज्य सरकार ने मामले की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंपी है। जांच एजेंसी भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। अब तक कई स्थानों पर छापेमारी की गई है, अनेक लोगों से पूछताछ की गई है और कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हाल के दिनों में तीन और संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और विस्तृत हुआ है। CID डिजिटल साक्ष्यों, दस्तावेजों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े व्यक्तियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि राज्य सरकार पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं के हितों से कोई समझौता नहीं होगा और किसी भी स्तर पर अनियमितता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि जब तक जांच के ठोस परिणाम सामने नहीं आते और उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच विपक्षी दल भी भर्ती विवाद को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर हैं और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में पूरे राज्य की नजर अब CID जांच की प्रगति और सरकार द्वारा लिए जाने वाले अगले निर्णय पर टिकी हुई है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर आंदोलन की आगे की दिशा तय होगी।




