सावन शिवरात्रि से पहले कांवड़ यात्रा अपने अंतिम और सबसे व्यस्त चरण में पहुंच गई है। लाखों डाक कांवड़ियों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस ने 7 अगस्त से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) पर आम वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध दिल्ली बॉर्डर स्थित यूपी गेट से मेरठ सीमा के पास काशी टोल प्लाजा तक लागू रहेगा। इस अवधि में एक्सप्रेसवे की सभी छह लेन केवल डाक कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेंगी और कार, बस, ट्रक समेत सभी सामान्य वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था कांवड़ यात्रा के समापन और शिवरात्रि तक प्रभावी रहेगी।
प्रशासन के अनुसार कांवड़ यात्रा के अंतिम दिनों में डाक कांवड़ियों की संख्या सबसे अधिक होती है। ये श्रद्धालु बिना रुके तेज गति से अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं, इसलिए उनके मार्ग पर किसी भी प्रकार के सामान्य यातायात से दुर्घटना और जाम की आशंका बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पहले भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया था, जबकि अब हल्के और मध्यम श्रेणी के वाहनों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
आम यात्रियों की सुविधा के लिए प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग भी निर्धारित किए हैं। दिल्ली से मेरठ, गाजियाबाद या पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले वाहन एनएच-9 (पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग), ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) तथा अन्य निर्धारित मार्गों का उपयोग कर सकेंगे। लोगों से यात्रा शुरू करने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखने और भीड़भाड़ वाले समय में अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। इसके साथ ही गाजियाबाद, मेरठ और आसपास के जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। प्रमुख कांवड़ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, बैरिकेडिंग की गई है तथा सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है। आपातकालीन सेवाओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वे निर्धारित डायवर्जन का पालन करें, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन न करें और किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें। अधिकारियों के अनुसार कांवड़ यात्रा के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त डायवर्जन या नए प्रतिबंध भी लागू किए जा सकते हैं। प्रशासन का लक्ष्य श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के साथ-साथ क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को पूरी तरह सुचारु बनाए रखना है।




