नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस से पहले राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद मजबूत किया जा रहा है। लाल किला, जहां से प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करेंगे, सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे संवेदनशील स्थानों में शामिल है। इस बार सुरक्षा व्यवस्था में पारंपरिक पुलिस बल और बैरिकेडिंग के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। लाल किले और आसपास के इलाकों में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र, खुफिया इनपुट और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय पर विशेष जोर है।
जुलाई 2026 में जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बनी थी। 22 जुलाई को हुई एक घटना में पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए और स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इसके बाद मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई।
इसी बीच सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान स्वतंत्रता दिवस समारोह को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने पर है। दिल्ली पुलिस ने पड़ोसी राज्यों की पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाने के लिए उच्चस्तरीय बैठकें की हैं। इसका उद्देश्य खुफिया सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर और किसी संभावित खतरे की स्थिति में संयुक्त कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना है।
लाल किले के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा
लाल किले और उसके आसपास सुरक्षा को कई स्तरों में बांटकर लागू किया जाता है। बाहरी इलाकों में यातायात और भीड़ प्रबंधन से लेकर कार्यक्रम स्थल के आसपास प्रवेश नियंत्रण और अंदरूनी सुरक्षा तक अलग-अलग स्तरों पर सुरक्षा बल तैनात किए जाते हैं। संवेदनशील स्थानों पर वाहनों और लोगों की जांच बढ़ाई जाती है तथा सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए लगातार निगरानी रखती हैं।
पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस के दौरान लाल किले और आसपास के क्षेत्र में करीब 15,000 दिल्ली पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा स्नाइपर, SWAT कमांडो, ड्रोन और AI-सक्षम CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया गया था। 2025 की तैयारियों में लगभग 700 AI-सक्षम CCTV कैमरों और चेहरे की पहचान वाली निगरानी व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया था।
20 हजार जवानों का आंकड़ा किससे जुड़ा है?
लाल किले की सुरक्षा को लेकर 20,000 जवानों की तैनाती का आंकड़ा हाल की 2026 की व्यवस्था के बजाय 15 अगस्त 2025 की सुरक्षा तैयारियों से संबंधित रिपोर्टों में सामने आया था। उस समय लाल किले के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के साथ करीब 20 हजार जवानों की तैनाती और लगभग 800 CCTV कैमरों से निगरानी की जानकारी दी गई थी। इसलिए 2026 की खबर में इस आंकड़े को वर्तमान तैनाती के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
इस बार हाईटेक निगरानी पर खास जोर
2026 की स्वतंत्रता दिवस सुरक्षा तैयारियों में आधुनिक तकनीक की भूमिका और बढ़ाई जा रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक इस बार ‘अभिज्ञान’ ऐप को भी सुरक्षा ड्यूटी में शामिल किया जा रहा है। यह ऐप राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) से जुड़ी तकनीक के रूप में पुलिसकर्मियों को मौके पर फिंगरप्रिंट के आधार पर पहचान संबंधी जानकारी हासिल करने में मदद करता है।
गृह मंत्री अमित शाह ने जून 2026 में इस ऐप को लॉन्च किया था। रिपोर्टों के अनुसार यह तकनीक पुलिसकर्मियों को मोबाइल डिवाइस के जरिए फिंगरप्रिंट का मिलान करने और उपलब्ध आपराधिक रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी तेजी से प्राप्त करने की सुविधा देती है। इससे किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की प्रक्रिया को मौके पर ही तेज किया जा सकता है।
AI और चेहरे की पहचान वाली तकनीक का इस्तेमाल
दिल्ली में बड़े राष्ट्रीय आयोजनों के दौरान AI आधारित निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। गणतंत्र दिवस 2026 की सुरक्षा के दौरान दिल्ली पुलिस ने AI-सक्षम स्मार्ट ग्लास का इस्तेमाल किया था, जिनमें चेहरे की पहचान और थर्मल इमेजिंग जैसी क्षमताएं शामिल थीं। राजधानी में हजारों CCTV कैमरों और कई नियंत्रण कक्षों के माध्यम से निगरानी की गई थी।
लाल किले की सुरक्षा में भी इसी तरह की तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए किया जाता रहा है। पिछले स्वतंत्रता दिवसों में चेहरे की पहचान और वीडियो एनालिटिक्स से लैस CCTV नेटवर्क को सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया था।
ड्रोन और आसमान से भी नजर
लाल किले जैसे हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में जमीन के साथ-साथ हवाई क्षेत्र की निगरानी भी महत्वपूर्ण होती है। स्वतंत्रता दिवस के दौरान ड्रोन और अन्य उड़ने वाली वस्तुओं पर विशेष निगरानी रखी जाती है। सुरक्षा एजेंसियां आसपास के क्षेत्र में किसी अनधिकृत ड्रोन या संदिग्ध हवाई गतिविधि को लेकर सतर्क रहती हैं। जरूरत के अनुसार एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य तकनीकी उपायों का इस्तेमाल भी सुरक्षा ग्रिड का हिस्सा बनाया जाता है।
दिल्ली मेट्रो में भी बढ़ाई गई जांच
स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए सुरक्षा का दायरा केवल लाल किले तक सीमित नहीं है। दिल्ली मेट्रो रेल नेटवर्क में भी 9 अगस्त से 16 अगस्त तक सुरक्षा जांच बढ़ाने की एडवाइजरी जारी की गई है। यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी गई है, क्योंकि स्टेशनों पर सामान और यात्रियों की जांच में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लग सकता है।
लाल किला 15 अगस्त तक आम लोगों के लिए बंद
स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने लाल किले को 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक आम पर्यटकों के लिए बंद रखने की घोषणा की है। इस अवधि में आयोजन की तैयारियों के साथ सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच बढ़ाया गया तालमेल
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजन के दौरान दिल्ली पुलिस के अलावा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है। हाल की बैठकों में खुफिया जानकारी साझा करने, अंतरराज्यीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की तैयारी पर जोर दिया गया है।
जंतर-मंतर की घटनाओं से क्या सबक?
जंतर-मंतर पर हालिया हिंसक घटनाओं ने भीड़ नियंत्रण और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा के महत्व को फिर सामने ला दिया है। 20 जुलाई को प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और संसद के आसपास 2,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की थी। कई स्तर की बैरिकेडिंग और दंगा नियंत्रण उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था। बाद में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं।
इन घटनाओं के बीच स्वतंत्रता दिवस जैसे बड़े आयोजन के लिए सुरक्षा एजेंसियां भीड़ की आवाजाही, प्रवेश और निकास, संवेदनशील मार्गों तथा आसपास के इलाकों पर विशेष निगरानी रख रही हैं। उद्देश्य यह है कि किसी अप्रत्याशित स्थिति में भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने में किसी तरह की परेशानी न हो।
इस बार सुरक्षा व्यवस्था में क्या खास है?
2026 की तैयारियों में सबसे बड़ा बदलाव तकनीक और डेटा आधारित निगरानी को अधिक महत्व दिया जाना है। CCTV, वीडियो एनालिटिक्स, चेहरे की पहचान, ड्रोन निगरानी, फिंगरप्रिंट आधारित पहचान तकनीक और केंद्रीय नियंत्रण व्यवस्था जैसी क्षमताएं सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में मदद कर रही हैं। इसके साथ ही मैनुअल जांच, पुलिस बल की तैनाती और खुफिया निगरानी को भी समान महत्व दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, स्वतंत्रता दिवस से पहले लाल किले और मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है। 20,000 जवानों का आंकड़ा 2025 की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है, जबकि 2026 में तकनीकी निगरानी और एजेंसियों के बीच समन्वय पर खास जोर दिखाई दे रहा है। जंतर-मंतर पर हाल की हिंसक घटनाओं के बाद भीड़ नियंत्रण और संवेदनशील इलाकों की निगरानी को लेकर सतर्कता बढ़ी है। सुरक्षा एजेंसियों की कोशिश है कि 15 अगस्त का राष्ट्रीय समारोह पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो और राजधानी में किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।




