केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सुरक्षा और जांच एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात होने वाले कर्मियों के कार्यकाल को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और असम राइफल्स (AR) से कुछ विशेष केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले कर्मियों का कार्यकाल पांच साल से बढ़ाकर सात साल तक किया गया है। सरकार का उद्देश्य इन एजेंसियों में प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मियों को लंबे समय तक बनाए रखना तथा उनके अनुभव और विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल करना है।
गृह मंत्रालय के पुलिस-II प्रभाग के कार्मिक नीति अनुभाग ने इस संबंध में 5 मार्च 2026 को निर्देश जारी किए। इसके तहत वर्ष 2016 में जारी प्रतिनियुक्ति नीति के संबंधित प्रावधानों में संशोधन किया गया। नई व्यवस्था के अनुसार, जिन CAPF और असम राइफल्स कर्मियों को संबंधित एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाएगा, उन्हें नियुक्ति के समय ही अधिकतम सात साल की प्रतिनियुक्ति अवधि दी जा सकती है। इससे पहले सामान्य व्यवस्था के तहत यह अवधि पांच साल तक थी।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस बदलाव का सीधा लाभ नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) जैसी एजेंसियों को मिलेगा। इन संस्थानों में काम करने वाले कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण और संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने का अनुभव हासिल करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक उनकी सेवाएं उपलब्ध रहने से एजेंसियों को अनुभवी मानव संसाधन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
प्रतिनियुक्ति की अवधि बढ़ाने के पीछे सबसे अहम वजह विशेषज्ञ और प्रशिक्षित कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखना मानी जा रही है। विशेष एजेंसियों में तैनाती के बाद कर्मचारियों को संबंधित संस्थान की कार्यप्रणाली, ऑपरेशनल प्रक्रियाओं और विशेष जिम्मेदारियों का अनुभव हासिल करने में समय लगता है। यदि कुछ वर्षों के बाद ही उन्हें मूल बल में वापस भेज दिया जाता है तो एजेंसी को उनकी जगह नए कर्मियों को नियुक्त और प्रशिक्षित करना पड़ता है। सात साल की अवधि इस तरह के बार-बार होने वाले बदलाव को कम कर सकती है।
NSG के मामले में यह फैसला विशेष महत्व रखता है। आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित इस बल में ऑपरेशनल अनुभव, टीमवर्क और विशेष कौशल की अहम भूमिका होती है। गृह मंत्रालय की नीति में बदलाव का एक कारण यह भी बताया गया है कि NSG ने प्रतिनियुक्ति की अवधि पांच से बढ़ाकर सात साल करने का अनुरोध किया था। इसके बाद मंत्रालय ने CAPF और असम राइफल्स के साथ विचार-विमर्श किया और लंबी अवधि की प्रतिनियुक्ति के प्रस्ताव पर सहमति बनी।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA में भी इस फैसले का प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। आतंकवाद, आतंकी फंडिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों की जांच करने वाली इस एजेंसी में पुलिस और सुरक्षा बलों से आने वाले अनुभवी अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय तक प्रतिनियुक्ति रहने से जांच टीमों में अनुभव की निरंतरता बनी रह सकती है और अधिकारियों को जटिल मामलों पर लंबे समय तक काम करने का अवसर मिल सकता है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB में भी प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की विशेषज्ञता का उपयोग मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े संगठित अपराधों के खिलाफ कार्रवाई में किया जाता है। इसी तरह NDRF में तैनात कर्मियों को आपदा राहत और बचाव अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। दोनों क्षेत्रों में लंबे समय तक अनुभवी कर्मियों की उपलब्धता से संस्थागत क्षमता और ऑपरेशनल निरंतरता मजबूत होने की उम्मीद है।
इस फैसले का असर CAPF और असम राइफल्स के उन कर्मियों पर पड़ेगा जिन्हें इन केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है। अब संबंधित एजेंसियों को अनुभवी कर्मचारियों की उपलब्धता के बारे में अधिक लंबी अवधि की योजना बनाने में सुविधा होगी। वहीं, प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले कर्मियों को भी बार-बार कार्यकाल विस्तार या स्थानांतरण की अनिश्चितता का सामना कम करना पड़ सकता है।
सात साल की प्रतिनियुक्ति से मानव संसाधन प्रबंधन में भी सुधार की उम्मीद है। किसी अनुभवी कर्मचारी के प्रतिनियुक्ति कार्यकाल के अचानक समाप्त होने पर संबंधित एजेंसी को उसकी जगह नए कर्मचारी की तलाश करनी पड़ती है। इसके बाद नए कर्मी को प्रशिक्षण और कामकाज समझने में समय लगता है। लंबी प्रतिनियुक्ति अवधि से ऐसी स्थिति की आवृत्ति कम हो सकती है और एजेंसियां अपने मानव संसाधन को अधिक प्रभावी ढंग से व्यवस्थित कर सकती हैं।
हालांकि, CBI को लेकर इस फैसले की व्याख्या करते समय सावधानी जरूरी है। उपलब्ध मार्च 2026 के गृह मंत्रालय के आदेश में CAPF और असम राइफल्स कर्मियों की सात साल की प्रतिनियुक्ति के लिए NSG, NIA, NCB और NDRF का उल्लेख मिलता है। CBI का नाम इस विशेष आदेश में नहीं दिखाई देता। CBI में IPS अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से जुड़े नियम अलग व्यवस्था के तहत आते हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि इसी आदेश के तहत CBI में भी CAPF और असम राइफल्स कर्मियों की प्रतिनियुक्ति अवधि सात साल कर दी गई है।
कुल मिलाकर, गृह मंत्रालय का यह बदलाव केंद्रीय सुरक्षा और जांच व्यवस्था में विशेषज्ञता तथा संस्थागत अनुभव को लंबे समय तक बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पांच साल की जगह सात साल की प्रतिनियुक्ति से NSG, NIA, NCB और NDRF जैसी एजेंसियों को अनुभवी कर्मियों की सेवाएं अधिक समय तक मिल सकेंगी। इससे ऑपरेशनल निरंतरता, मानव संसाधन प्रबंधन और विशेष प्रशिक्षण से हासिल विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल होने की उम्मीद है। हालांकि, अलग-अलग केंद्रीय एजेंसियों की प्रतिनियुक्ति व्यवस्था अलग होने के कारण प्रत्येक एजेंसी पर लागू नियमों को उसके संबंधित आदेश के आधार पर ही समझना उचित होगा।




