जब बंटवारे ने उजाड़ दिए थे लाखों घर: PM मोदी ने याद किया विस्थापितों का साहस और संघर्ष

SHARE:

स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले 14 अगस्त को देश विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में 1947 के बंटवारे के दौरान जान गंवाने वाले और विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले लोगों को याद करता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन की त्रासदी से प्रभावित लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि बंटवारे का दौर असंख्य परिवारों के लिए बेहद पीड़ादायक था। लाखों लोग अपने घर, जमीन और वर्षों पुरानी सामाजिक जड़ों से अलग हो गए, जबकि कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में उन लोगों के साहस और संघर्ष को विशेष रूप से याद किया, जिन्होंने विभाजन की भयावह परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि अपनों से बिछड़ने और सब कुछ पीछे छोड़ने के बाद भी लोगों ने हिम्मत जुटाई और नई जगहों पर अपनी जिंदगी दोबारा खड़ी की। विस्थापित परिवारों ने कठिन परिस्थितियों में नए सिरे से घर बसाए और आगे चलकर देश के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

1947 का विभाजन केवल भारत की राजनीतिक सीमाओं के बदलाव तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका गहरा मानवीय प्रभाव पड़ा। बड़ी संख्या में लोगों को अपने पुश्तैनी घर छोड़कर सीमा के दूसरी ओर जाना पड़ा। परिवारों के बिखरने, संपत्ति छूटने और हिंसा के बीच सुरक्षित स्थान की तलाश ने लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया। इतिहासकारों के अनुसार, विभाजन के दौरान करोड़ों लोग विस्थापित हुए और यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े मानवीय पलायनों में से एक था।

विभाजन के बाद विस्थापित लोगों के सामने जीवन को नए सिरे से शुरू करने की चुनौती थी। जिन परिवारों ने अपनी संपत्ति और आजीविका पीछे छोड़ दी थी, उन्हें नए शहरों और कस्बों में घर, रोजगार और कारोबार की व्यवस्था करनी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों का सामना किया और धीरे-धीरे अपने जीवन को पटरी पर लाया। अनेक परिवारों ने व्यापार, उद्योग, शिक्षा, कृषि और विभिन्न पेशों में आगे बढ़कर देश के निर्माण में योगदान दिया।

14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने की घोषणा केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में की थी। इस दिवस का उद्देश्य विभाजन के दौरान पीड़ा झेलने वाले लोगों को याद करना और आने वाली पीढ़ियों को उस त्रासदी के मानवीय पहलू से परिचित कराना है। इसके जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया जाता है कि इतिहास की भयावह घटनाओं से सीख लेकर समाज में नफरत, हिंसा और विभाजन की प्रवृत्तियों को रोकने तथा भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करने की जरूरत है।

भारत की आजादी की कहानी में 15 अगस्त 1947 का दिन गौरव और खुशी का प्रतीक है, लेकिन इसके साथ विभाजन की पीड़ा भी जुड़ी हुई है। एक ओर देश ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता हासिल की, वहीं दूसरी ओर लाखों लोगों को विस्थापन, हिंसा और बिछड़ने का दर्द झेलना पड़ा। यही वजह है कि विभाजन की स्मृति आज भी अनेक परिवारों की पीढ़ियों में जीवित है और उनकी व्यक्तिगत कहानियों के माध्यम से उस दौर की पीड़ा सामने आती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर लोगों से अतीत के दर्द को याद करते हुए वर्तमान और भविष्य में एकता, भाईचारे तथा सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संकल्प लेने की अपील की। विभाजन की त्रासदी से निकली पीढ़ियों की संघर्ष और पुनर्निर्माण की कहानी इस बात का उदाहरण है कि बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद इंसान अपने जीवन को दोबारा खड़ा कर सकता है। यह दिवस इसी संघर्ष, साहस और मानवीय जिजीविषा को याद करने का अवसर भी है।

Leave a Comment