तमिलनाडु में हेल्थ कवर बढ़ा और दूध के दाम भी बढ़े, जानें सीएम विजय के बड़े ऐलान

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में राज्य के लोगों और दुग्ध उत्पादकों के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। इनमें स्वास्थ्य बीमा की सीमा बढ़ाने और दूध खरीद मूल्य में वृद्धि का फैसला प्रमुख है। सरकार ने मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सालाना स्वास्थ्य बीमा कवर को ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख करने का ऐलान किया है। यानी अब पात्र परिवारों को पहले की तुलना में पांच गुना अधिक उपचार कवरेज मिल सकेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य गंभीर बीमारियों और महंगे इलाज के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

स्वास्थ्य बीमा कवर बढ़ाने का फैसला विशेष रूप से उन मरीजों और परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें कैंसर, बड़ी सर्जरी या लंबे समय तक चलने वाले महंगे उपचार की जरूरत पड़ती है। नई व्यवस्था के तहत पात्र लाभार्थियों को सरकारी और योजना में शामिल निजी अस्पतालों में अधिक महंगे उपचार का लाभ मिल सकेगा। यह फैसला मुख्यमंत्री विजय की उस चुनावी प्रतिबद्धता से भी जुड़ा है, जिसमें राज्य के परिवारों के लिए ₹25 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवर देने का वादा किया गया था।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बीमा कवर बढ़ाने के साथ सरकार ने चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कई घोषणाएं की हैं। चेन्नई के राजीव गांधी सरकारी अस्पताल में करीब ₹470 करोड़ की लागत से कैंसर उपचार केंद्र स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा राज्य के पांच प्रमुख अस्पतालों में क्षेत्रीय कैंसर केंद्र विकसित करने की बात कही गई है। चेन्नई के पेरंबूर में लगभग ₹300 करोड़ की लागत से 400 बिस्तरों वाला हाई-स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अतिरिक्त सीटें बढ़ाने की योजना है, जिसके तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल 6,098 अतिरिक्त सीटें जोड़े जाने की जानकारी दी गई है।

मुख्यमंत्री की दूसरी बड़ी घोषणा दुग्ध उत्पादकों से संबंधित रही। सरकार ने सरकारी डेयरी संस्था आविन के लिए किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत ₹38 से बढ़ाकर ₹41 प्रति लीटर करने का फैसला किया है। इस वृद्धि में सरकार की ओर से ₹3 प्रति लीटर का प्रोत्साहन शामिल है। सरकार के अनुसार इस फैसले से राज्य के 3.16 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को फायदा मिलने की उम्मीद है। दूध की खरीद कीमत बढ़ने से दुग्ध उत्पादकों को अपनी उपज के लिए पहले की तुलना में बेहतर भुगतान मिलने की संभावना है।

दूध खरीद मूल्य बढ़ाने का फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में दूध उत्पादक संगठन कीमत बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इससे पहले एक दुग्ध उत्पादक संगठन ने गाय के दूध की खरीद कीमत ₹43 और भैंस के दूध की कीमत ₹60 प्रति लीटर करने की मांग की थी। संगठन की ओर से मांगें पूरी नहीं होने पर दूध आपूर्ति रोकने की चेतावनी भी दी गई थी। ऐसे में सरकार का ₹3 प्रति लीटर का इजाफा दुग्ध क्षेत्र में जारी मांगों और सरकार के बीच बने दबाव को कम करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

सरकार पर दूध खरीद कीमत बढ़ाने से अतिरिक्त वित्तीय भार भी पड़ेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस फैसले से राज्य सरकार पर लगभग ₹30 करोड़ प्रति माह और करीब ₹360 करोड़ सालाना का अतिरिक्त बोझ आने का अनुमान है। सरकार का तर्क है कि बेहतर खरीद मूल्य से दूध उत्पादकों को आर्थिक राहत मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

मुख्यमंत्री विजय की घोषणाओं में किसानों के लिए ऋण राहत भी शामिल रही। सरकार ने पात्र किसानों के ₹75,000 तक के सहकारी कृषि ऋण को पूरी तरह माफ करने की घोषणा की है। इससे लगभग 1.38 लाख किसानों को लाभ मिलने का अनुमान है। इस ऋण माफी के तहत सरकार पर करीब ₹953 करोड़ का वित्तीय भार पड़ने की बात सामने आई है। इससे पहले ₹50,000 तक के कृषि ऋण की माफी का फैसला भी किया गया था, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को राहत मिलने की जानकारी दी गई थी।

इन घोषणाओं को व्यापक रूप से देखें तो मुख्यमंत्री विजय सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर ध्यान केंद्रित किया है। स्वास्थ्य बीमा कवर को ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख करना गंभीर बीमारी की स्थिति में परिवारों को बड़ी आर्थिक सुरक्षा दे सकता है, जबकि दूध खरीद मूल्य में वृद्धि का सीधा असर दुग्ध उत्पादकों की आय पर पड़ सकता है। इसके साथ अस्पतालों, कैंसर उपचार और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की योजनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की सरकार की प्राथमिकता को दर्शाती हैं।

हालांकि, इन घोषणाओं का वास्तविक असर योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट होगा। स्वास्थ्य बीमा की बढ़ी हुई सीमा का लाभ कितने लोगों तक पहुंचता है, किन उपचारों और अस्पतालों को इसके दायरे में शामिल किया जाता है और दूध खरीद मूल्य में वृद्धि का भुगतान किसानों तक किस तरह पहुंचता है, ये सभी बातें इसके प्रभाव को तय करेंगी। फिलहाल सरकार के इन फैसलों को स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और किसानों व दुग्ध उत्पादकों को आर्थिक राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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