फर्जी इनवॉइस से ITC का खेल? ED ने नौ ठिकानों पर की छापेमारी

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े कथित मामले में सोमवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी की टीमों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के तीन शहरों में एक साथ नौ ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े मामले की जांच के तहत की जा रही है। ED की टीमें संबंधित परिसरों में दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।

जानकारी के मुताबिक, ED की कार्रवाई मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में की गई। सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान एजेंसी के अधिकारियों ने संबंधित परिसरों में मौजूद कारोबारी दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की। तलाशी के दौरान मिलने वाले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड आगे की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मामले का मुख्य केंद्र कथित फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) है। GST व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट के तहत किसी कारोबारी को पात्र खरीद पर चुकाए गए GST को अपनी बिक्री पर देय GST के विरुद्ध समायोजित करने की सुविधा मिलती है। आरोप है कि इस मामले में वास्तविक माल की खरीद या आपूर्ति के बिना फर्जी चालान और ई-वे बिल तैयार किए गए और उनके आधार पर ITC का दावा किया गया। यदि बिना वास्तविक कारोबारी लेनदेन के ITC लिया या आगे ट्रांसफर किया जाता है, तो इसे GST व्यवस्था के दुरुपयोग के तौर पर देखा जाता है।

जांच एजेंसी कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी चालान किस तरीके से तैयार किए गए और किन कंपनियों या कारोबारियों के बीच उनका इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही यह भी जांच का हिस्सा है कि इन दस्तावेजों के आधार पर कितना ITC बनाया गया और उसे किन-किन इकाइयों तक पहुंचाया गया। जांचकर्ताओं की नजर बैंक खातों और कारोबारी रिकॉर्ड पर भी है, ताकि कागजों पर दिखाए गए लेनदेन और वास्तविक वित्तीय गतिविधियों के बीच किसी अंतर का पता लगाया जा सके।

यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ED की जांच के दायरे में है। ऐसे मामलों में एजेंसी कथित अपराध से पैदा हुई रकम के स्रोत, उसके इस्तेमाल और अलग-अलग खातों या संस्थाओं के माध्यम से उसके लेनदेन की जांच करती है। मौजूदा तलाशी अभियान में भी वित्तीय दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा जांच के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

ED की कार्रवाई जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े कथित फर्जी ITC नेटवर्क की जांच का हिस्सा बताई जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी बिलिंग व्यवस्था में कौन-कौन सी कंपनियां या कारोबारी शामिल थे और बिना वास्तविक माल की आवाजाही के लेनदेन दिखाने के लिए किस तरह के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

तलाशी अभियान पूरा होने के बाद ED द्वारा बरामद या प्राप्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा। यदि जांच के दौरान पर्याप्त सबूत सामने आते हैं, तो एजेंसी आगे पूछताछ, बयान दर्ज करने, संपत्तियों की पहचान या कानून के तहत अन्य कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, इस चरण पर किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, क्योंकि जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

फर्जी बिलिंग और ITC धोखाधड़ी के मामलों पर GST और जांच एजेंसियों की सख्ती लगातार बढ़ रही है। ऐसे मामलों में कागजी लेनदेन के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की आशंका रहती है। तीन शहरों के नौ ठिकानों पर हुई यह तलाशी इसी कथित नेटवर्क की वास्तविकता और उसके वित्तीय लेनदेन की जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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