शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले एक्टिव हुआ कूटनीतिक चैनल, बीजिंग पहुंचे डोभाल

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भारत और चीन के रिश्तों में सुधार की कोशिशों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बीजिंग पहुंच गए हैं। डोभाल चीन के विदेश मंत्री और भारत-चीन सीमा वार्ता के विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ 25वें दौर की Special Representatives (SR) वार्ता में हिस्सा लेंगे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पैदा हुए तनाव को कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की कोशिश जारी है। ऐसे में डोभाल और वांग यी की बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत का मुख्य उद्देश्य सीमा विवाद से जुड़े जटिल मुद्दों पर राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान तलाशना तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना है। दोनों देशों के बीच यह तंत्र 2003 में स्थापित किया गया था। पिछले कुछ वर्षों में सीमा पर सैन्य तनाव के कारण इस वार्ता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि दोनों देशों के व्यापक संबंधों में स्थिरता के लिए सीमा पर शांति और सौहार्द जरूरी है।

डोभाल की बीजिंग यात्रा का समय भी खास महत्व रखता है। भारत इस साल सितंबर में नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। इस सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह कई वर्षों बाद उनकी भारत यात्रा होगी। हालांकि, उनकी यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर अंतिम घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में डोभाल-वांग यी वार्ता को संभावित मोदी-शी मुलाकात से पहले माहौल तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत की प्राथमिकता LAC पर बनी शांति को स्थायी और भरोसेमंद बनाना है। जून 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सैन्य गतिरोध रहा था। इसके बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई और अक्टूबर 2024 में सीमा पर कुछ क्षेत्रों में disengagement की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसके बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क में भी धीरे-धीरे वृद्धि हुई है। हालांकि, सीमा विवाद का स्थायी समाधान अभी बाकी है और कई संवेदनशील मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

अगस्त 2026 की शुरुआत में भारत और चीन के अधिकारियों के बीच Working Mechanism for Consultation and Coordination on Border Affairs (WMCC) की 36वीं बैठक भी हुई थी। इस दौरान सीमा प्रबंधन, सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने और दोनों देशों के बीच संवाद को जारी रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बैठक दिखाती है कि दोनों पक्ष सीमा से जुड़े मामलों को लेकर स्थापित संवाद तंत्रों का इस्तेमाल जारी रखना चाहते हैं। अब इसी प्रक्रिया को उच्च राजनीतिक स्तर पर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी डोभाल और वांग यी की बैठक पर है।

डोभाल और वांग यी के बीच इससे पहले जून 2026 में भी बातचीत हुई थी। वांग यी भारत में BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में शामिल होने आए थे और इसी दौरान उन्होंने डोभाल के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की थी। उस बातचीत में दोनों देशों के संबंधों को स्थिर करने और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था। इसके कुछ समय बाद डोभाल का बीजिंग पहुंचना यह संकेत देता है कि दोनों पक्ष उच्चस्तरीय रणनीतिक संवाद को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।

भारत और चीन के रिश्तों में सीमा विवाद के साथ आर्थिक संबंध भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों देश बड़े व्यापारिक साझेदार हैं और उनके बीच व्यापार, निवेश, सप्लाई चेन तथा तकनीकी क्षेत्रों में व्यापक आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। सीमा पर तनाव कम होने के साथ आर्थिक संबंधों को सामान्य बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा बढ़ी है। हालांकि, भारत संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सावधानी बरतता रहा है। इसलिए आने वाले समय में आर्थिक सहयोग और सुरक्षा हितों के बीच संतुलन बनाना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहेगा।

संभावित मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात को लेकर भी डोभाल-वांग वार्ता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि शी जिनपिंग सितंबर में BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत में सीमा विवाद, LAC पर शांति, व्यापार, निवेश, क्षेत्रीय सुरक्षा और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। हालांकि, जब तक चीन या भारत की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक इस मुलाकात को संभावित ही माना जाना चाहिए।

भारत का स्पष्ट संदेश है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह सामान्य बनाना मुश्किल होगा। इसलिए डोभाल-वांग यी वार्ता में पुराने सीमा विवादों के साथ-साथ भविष्य में किसी नए तनाव को रोकने के लिए प्रभावी संवाद और सीमा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा सकता है। दोनों पक्षों के लिए यह जरूरी होगा कि सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर संपर्क लगातार बना रहे तथा पहले से बनी सहमतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

कुल मिलाकर, अजीत डोभाल और वांग यी की 25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता भारत-चीन संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पड़ाव है। बैठक से सीमा पर शांति बनाए रखने, भरोसा बहाल करने और दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। साथ ही, यदि सितंबर में शी जिनपिंग की भारत यात्रा होती है, तो डोभाल-वांग वार्ता उस संभावित मोदी-शी मुलाकात के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, वास्तविक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश सीमा विवाद और आपसी विश्वास से जुड़े मुद्दों पर कितनी ठोस सहमति बना पाते हैं।

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