नेपाल में बाढ़ के बाद दूसरी आपदा का डर, नई झील पर नजर; 72 घंटे रहना होगा सतर्क

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नेपाल और तिब्बत के हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने कई इलाकों में सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं और दूसरे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और दूरदराज के क्षेत्रों से जानकारी मिलने के साथ मृतकों तथा लापता लोगों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

इस प्राकृतिक आपदा का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में करीब 290 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें तीर्थयात्री, पर्यटक और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। कुछ भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। अधिकारियों की ओर से प्रभावित भारतीयों का पता लगाने और उनके परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई रास्ते बाधित हो गए हैं और कुछ तीर्थयात्री ऐसे क्षेत्रों में फंस गए हैं जहां सामान्य सड़क संपर्क बहाल नहीं हो पाया है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 200 भारतीय तीर्थयात्रियों ने सुरक्षित निकासी की मांग की है। भारतीय अधिकारी नेपाल और चीन के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि प्रभावित भारतीयों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।

प्रारंभिक आकलनों के मुताबिक यह घटना सामान्य बारिश से आई बाढ़ की तुलना में कहीं अधिक गंभीर थी। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, बर्फ और चट्टानों के अचानक टूटने से भारी मात्रा में पानी और मलबा नदी में पहुंचा, जिसके बाद कुछ स्थानों पर बेहद तेज फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा हो गई। पानी के साथ बहकर आए चट्टानों और मलबे ने रास्ते में आने वाले पुलों, सड़कों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया। विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तापमान में बदलाव और ग्लेशियरों की अस्थिरता ऐसी घटनाओं के जोखिम को बढ़ा सकती है।

पहली बाढ़ के बाद भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बाढ़ और भूस्खलन के कारण एक प्राकृतिक अवरोध के पीछे पानी जमा होने से नई झील बनने की खबर सामने आई है। इस झील को लेकर अधिकारियों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। यदि पानी का दबाव बढ़ने के कारण प्राकृतिक अवरोध कमजोर होता है और अचानक टूट जाता है, तो नीचे की ओर दोबारा तेज जलप्रवाह और बाढ़ आ सकती है। इसी वजह से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और आने वाले करीब 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

बाढ़ के कारण राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक जमीनी रास्ते से पहुंचना मुश्किल है। कुछ इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार भूस्खलन और मलबा गिरने का खतरा होने से बचाव दलों को भी सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ रहा है। जरूरत के अनुसार हेलीकॉप्टर और अन्य हवाई साधनों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

इस आपदा से नेपाल के साथ-साथ तिब्बत क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है। कैलाश मानसरोवर मार्ग पर पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की मौजूदगी के कारण कई देशों के नागरिक इसकी चपेट में आए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में 30 से अधिक देशों के नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और कनाडा सहित कई देशों के नागरिकों के भी प्रभावित होने की खबरें हैं। इससे राहत एवं बचाव अभियान का दायरा और बढ़ गया है।

भारत सरकार ने नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाया है। विदेश मंत्रालय की ओर से प्रभावित भारतीयों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है और नेपाल तथा चीन के प्रशासन के साथ संपर्क बनाए रखा गया है। जिन भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है, उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है। कई प्रभावित इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण लोगों से तुरंत संपर्क स्थापित करना मुश्किल हो रहा है।

विशेषज्ञ इस घटना को हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक जोखिम की गंभीर चेतावनी के रूप में भी देख रहे हैं। ग्लेशियरों के पिघलने, पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता और अचानक होने वाले मलबे के बहाव के कारण हिमालयी क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में मौसम की निगरानी, ग्लेशियरों और झीलों की लगातार निगरानी तथा समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियों को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

फिलहाल नेपाल में सेना, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य में जुटी हैं। लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालने का प्रयास जारी है। आने वाले 72 घंटे इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि नई बनी झील, कमजोर पहाड़ी ढलानों और संभावित भूस्खलन के कारण एक और जलसैलाब का खतरा बना हुआ है। हालांकि अभी यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि कोई नया बड़ा जलप्रवाह आएगा या नहीं, लेकिन संभावित जोखिम को देखते हुए प्रभावित इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। राहत अभियान आगे बढ़ने और दूरदराज के क्षेत्रों से संपर्क बहाल होने के बाद ही इस आपदा से हुए कुल नुकसान और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

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