सितंबर की शुरुआत महंगाई के झटके से, कमर्शियल LPG के साथ विमान ईंधन ATF भी हुआ महंगा

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सितंबर महीने की शुरुआत कारोबार और विमानन क्षेत्र के लिए बढ़ी हुई ईंधन लागत के साथ हुई है। तेल विपणन कंपनियों ने 1 सितंबर 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी की है। इसके अलावा विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत में भी 5.46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कमर्शियल LPG महंगा होने का सीधा असर होटल, रेस्तरां, ढाबे, बेकरी और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत पर पड़ सकता है, जबकि ATF की कीमत बढ़ने से एयरलाइनों के परिचालन खर्च में बढ़ोतरी की संभावना है।

दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 2,738 रुपये से बढ़कर 2,747.50 रुपये हो गई है। यानी राजधानी में एक सिलेंडर पर 9.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। चेन्नई में कीमत 2,906 रुपये से बढ़कर 2,916.50 रुपये हो गई है। मुंबई और कोलकाता में भी कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बदलाव किया गया है। अलग-अलग शहरों में LPG की कीमत स्थानीय करों और अन्य लागतों के कारण अलग रहती है।

इस बदलाव की खास बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी घरेलू रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर इस फैसले का तत्काल सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए LPG खरीदने वाले होटल और रेस्तरां संचालकों की लागत बढ़ सकती है।

कमर्शियल LPG का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्तरां, ढाबे, मिठाई की दुकानों, बेकरी और दूसरे खाद्य कारोबारों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। ऐसे प्रतिष्ठानों में रोजाना कई सिलेंडरों की खपत होती है, इसलिए प्रति सिलेंडर कीमत में छोटी बढ़ोतरी भी महीने के अंत में कुल खर्च को प्रभावित कर सकती है। कारोबारियों के सामने बढ़ी हुई लागत को खुद वहन करने या उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने का विकल्प होता है। यदि लागत का बोझ ग्राहकों पर डाला जाता है तो बाहर खाना खाने की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

कमर्शियल LPG की कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ महीनों में इसके दामों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मई 2026 में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में करीब 993 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद जून में भी कीमत बढ़ी, जबकि जुलाई और अगस्त में इसमें कटौती देखने को मिली। अगस्त में दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत घटकर 2,738 रुपये रह गई थी। सितंबर में इसमें फिर 9.50 रुपये की मामूली वृद्धि की गई है।

LPG के साथ विमानन क्षेत्र के लिए भी सितंबर की शुरुआत लागत बढ़ने वाली रही। एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमत में 5.46 प्रतिशत की वृद्धि की गई है और यह बढ़कर करीब 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गई है। ATF एयरलाइनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण परिचालन खर्चों में से एक है। इसलिए विमान ईंधन महंगा होने से एयरलाइनों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हवाई टिकट की कीमत तुरंत और उसी अनुपात में बढ़ जाएगी, क्योंकि किराया तय करने में ईंधन के अलावा मांग, क्षमता, प्रतिस्पर्धा, एयरलाइन की लागत और अन्य बाजार परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ईंधन की कीमतों में होने वाले बदलाव का संबंध अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों से भी होता है। कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक आपूर्ति, विदेशी मुद्रा विनिमय दर और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे में आने वाले महीनों में तेल और गैस की कीमतों पर नजर बनी रहेगी।

कमर्शियल LPG की कीमत बढ़ने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी पार्टी पहले भी व्यावसायिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को महंगाई से जोड़कर सरकार की आलोचना करती रही है। कांग्रेस का तर्क है कि कमर्शियल LPG महंगा होने से छोटे कारोबारियों पर लागत का दबाव बढ़ता है और इसका असर अंततः आम ग्राहकों पर पड़ सकता है। पार्टी ने सरकार की आर्थिक नीतियों और महंगाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीतिक हमला बोला है।

कांग्रेस ने इससे पहले मई और जून में हुई कमर्शियल LPG की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा था। पार्टी का कहना रहा है कि गैस, ईंधन और दूसरी आवश्यक लागतों में वृद्धि का असर छोटे दुकानदारों, होटल-रेस्तरां संचालकों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है। वहीं सरकार और तेल कंपनियों की ओर से कीमतों में होने वाले बदलाव को बाजार की परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों से जोड़कर देखा जाता है।

फिलहाल घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत स्थिर रहने से परिवारों की रसोई पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ा है। लेकिन कमर्शियल LPG और ATF की कीमतों में वृद्धि ने कारोबार और विमानन क्षेत्र की लागत को लेकर चिंता जरूर बढ़ाई है। आने वाले दिनों में यदि होटल-रेस्तरां और अन्य खाद्य कारोबार अपनी बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालते हैं, तो बाहर खाना महंगा हो सकता है। इसी तरह ATF की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो एयरलाइनों के किराया निर्धारण पर भी दबाव बढ़ सकता है। इस तरह सितंबर की शुरुआत में ईंधन कीमतों में हुए बदलाव का असर सीधे घरेलू रसोई पर भले ही न पड़ा हो, लेकिन कारोबार, खाद्य सेवाओं और विमानन क्षेत्र पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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