भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं के साथ भारत की कला, संस्कृति और हस्तशिल्प की झलक भी विदेशी मेहमानों को देखने को मिलेगी। ब्रिक्स समिट के दौरान मेहमानों के लिए तैयार की गई डाइनिंग टेबल पर जयपुर की पारंपरिक कारीगरी विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। जयपुर के कारीगरों ने इस खास आयोजन के लिए सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर और कटलरी तैयार की है। इन उत्पादों में पारंपरिक भारतीय शिल्प को आधुनिक डिजाइन और उपयोगिता के साथ जोड़ा गया है।
इस विशेष टेबलवेयर को तैयार करने की जिम्मेदारी जयपुर के अरुण्स ग्रुप से जुड़े कारीगरों को दी गई थी। इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब 300 कारीगरों ने काम किया। कई महीनों तक चले डिजाइन और निर्माण के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि टेबलवेयर अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन के अनुरूप हो, लेकिन उसमें भारतीय और खास तौर पर राजस्थान की पारंपरिक कला की पहचान भी साफ दिखाई दे। कारीगरों ने हाथ से की जाने वाली बारीक कारीगरी को आधुनिक तकनीक के साथ मिलाकर इन उत्पादों को तैयार किया है।
इस टेबलवेयर की खासियत सिर्फ इसकी सिल्वर फिनिश नहीं है, बल्कि इसके डिजाइन में भी काफी विविधता रखी गई है। मेहमानों को किस तरह का भोजन परोसा जाएगा, इसे ध्यान में रखते हुए अलग-अलग व्यंजनों के लिए अलग आकार और डिजाइन के बर्तन तैयार किए गए हैं। स्वागत के दौरान परोसे जाने वाले पेय से लेकर मुख्य भोजन और मिठाई तक के लिए अलग-अलग तरह के टेबलवेयर तैयार किए गए हैं। इस तरह पूरी डाइनिंग टेबल को एक समान डिजाइन तक सीमित रखने के बजाय भोजन की प्रकृति के अनुसार उसकी प्रस्तुति पर भी ध्यान दिया गया है।
इस पूरे कलेक्शन में करीब 60 से 70 अलग-अलग तरह के आइटम शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के बर्तन, कटलरी और मेहमानों की जरूरत के मुताबिक तैयार किए गए विशेष उत्पाद शामिल हैं। शुरुआती स्तर पर सीमित संख्या में डिजाइन तैयार किए जाने थे, लेकिन आयोजन की जरूरतों और मेहमानों के लिए अलग-अलग उपयोग को देखते हुए बाद में कलेक्शन का विस्तार किया गया। डिजाइन तैयार करने, नमूने बनाने और अंतिम उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया में लगभग चार से पांच महीने का समय लगा।
इस खास कलेक्शन में कुछ ऐसे उत्पाद भी तैयार किए गए हैं जो सामान्य टेबलवेयर से अलग हैं। इनमें शॉल ट्रे प्रमुख है। इसे मेहमानों को शॉल या अन्य सम्मान स्वरूप दी जाने वाली वस्तु को व्यवस्थित और गरिमापूर्ण तरीके से प्रस्तुत करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा बड़े आकार का फिंगर बाउल भी तैयार किया गया है। सामान्य फिंगर बाउल की तुलना में इसे बड़ा रखने का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए इसे अधिक सुविधाजनक बनाना है।
इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक तकनीक का मेल है। जयपुर धातु शिल्प और सजावटी हस्तकला के लिए लंबे समय से अपनी अलग पहचान रखता है। इसी विरासत को ध्यान में रखते हुए कारीगरों ने हाथ से किए जाने वाले बारीक काम को आधुनिक उत्पादन और डिजाइन तकनीकों के साथ जोड़ा। इससे तैयार उत्पादों में एक तरफ भारतीय शिल्प की पारंपरिक छाप दिखाई देती है, वहीं दूसरी तरफ वे आधुनिक अंतरराष्ट्रीय आयोजन की जरूरतों के अनुरूप भी नजर आते हैं।
इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए टेबलवेयर तैयार करना सामान्य ऑर्डर से अलग चुनौती थी। डिजाइनरों और कारीगरों को ऐसे उत्पाद तैयार करने थे जो देखने में आकर्षक होने के साथ-साथ रोजमर्रा के उपयोग के लिहाज से भी व्यावहारिक हों। इसके अलावा अलग-अलग देशों से आने वाले मेहमानों की भोजन संबंधी जरूरतों को भी ध्यान में रखना था। इसी वजह से डिजाइन और प्रोटोटाइप तैयार करने की प्रक्रिया पर काफी समय लगाया गया और अंतिम उत्पाद तैयार करने से पहले कई स्तरों पर काम किया गया।
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत अपनी आर्थिक और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के साथ-साथ देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है। सम्मेलन से जुड़े आयोजनों में अलग-अलग राज्यों के स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों को भी महत्व दिया जा रहा है। ऐसे में जयपुर के कारीगरों द्वारा तैयार किया गया यह सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर भी भारत की स्थानीय कला को वैश्विक मंच पर पेश करने की कोशिश का हिस्सा है। विदेशी मेहमानों के लिए यह सिर्फ भोजन परोसने का साधन नहीं होगा, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प की एक झलक भी पेश करेगा।
इस पूरे प्रोजेक्ट का महत्व स्थानीय कारीगरों के नजरिए से भी काफी बड़ा है। करीब 300 कारीगरों का इसमें शामिल होना दिखाता है कि पारंपरिक भारतीय हस्तकला को आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों की जरूरतों के साथ जोड़ा जा सकता है। ऐसे प्रोजेक्ट स्थानीय शिल्पकारों को बड़े मंच पर अपनी कला दिखाने का अवसर देते हैं और भारतीय हस्तशिल्प की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने में भी मदद कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, ब्रिक्स सम्मेलन में विदेशी मेहमानों की मेज पर रखा जाने वाला जयपुर का यह खास सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा की एक झलक पेश करेगा। करीब 300 कारीगरों की मेहनत से तैयार किए गए 60 से 70 तरह के उत्पादों में पारंपरिक कला, आधुनिक डिजाइन, उपयोगिता और भारतीय सौंदर्यबोध को एक साथ शामिल किया गया है। ऐसे में ब्रिक्स की बैठकों और भोज के दौरान वैश्विक नेताओं की नजर केवल मेन्यू पर ही नहीं, बल्कि जयपुर की इस बारीक कारीगरी पर भी जा सकती है।




