नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच भारत और मलेशिया के संबंधों को लेकर एक अहम बैठक हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में सदस्य तथा साझेदार देशों के शीर्ष नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम 11 से 14 सितंबर तक भारत की यात्रा पर हैं। उनकी यात्रा का प्रमुख उद्देश्य नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेना है। मलेशिया ब्रिक्स के साझेदार देशों में शामिल है और भारत के साथ उसके संबंध पिछले कुछ वर्षों में कई क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़े हैं। दोनों देश अब पारंपरिक व्यापारिक रिश्तों से आगे बढ़कर रक्षा, तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सेमीकंडक्टर, निवेश और सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।
भारत और मलेशिया के बीच रक्षा सहयोग इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2026 में मलेशिया यात्रा के दौरान भी दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। उस दौरान रक्षा के अलावा व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और उभरती तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के रक्षा प्रतिष्ठानों और उद्योगों के बीच संपर्क को और मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं।
मलेशिया की भारतीय रक्षा उद्योग में दिलचस्पी भी नई बात नहीं है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना चाहता है। ऐसे में भारतीय रक्षा कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग, संयुक्त उत्पादन और औद्योगिक साझेदारी की संभावनाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। भारत भी पिछले कुछ वर्षों में रक्षा उत्पादन बढ़ाने और मित्र देशों को स्वदेशी रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रहा है। इससे मलेशिया जैसे देशों के साथ रक्षा व्यापार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए मलेशिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले भारत के हल्के लड़ाकू विमान तेजस में रुचि दिखा चुका है। हालांकि, मलेशिया ने अपनी लीड-इन ट्रेनर और हल्के लड़ाकू विमान की जरूरत के लिए दक्षिण कोरिया के FA-50 को चुना था और तेजस उस प्रतिस्पर्धा में सफल नहीं हो पाया। इसके बावजूद भारत और मलेशिया के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग की संभावनाएं बनी हुई हैं। भारतीय कंपनियां अब केवल तैयार रक्षा उपकरणों की बिक्री के बजाय स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर उत्पादन और तकनीकी सहयोग के अवसर तलाश रही हैं।
मलेशिया में आयोजित डिफेंस सर्विसेज एशिया यानी DSA जैसे प्रमुख रक्षा कार्यक्रमों में भारतीय कंपनियों की बढ़ती भागीदारी भी दोनों देशों के बीच रक्षा कारोबार की संभावनाओं को दर्शाती है। 2026 में भारतीय रक्षा उद्योग की बड़ी संख्या में कंपनियों ने मलेशिया के प्रमुख रक्षा एवं सुरक्षा प्रदर्शनी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इससे भारतीय रक्षा उत्पादों और तकनीक को दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजार में प्रदर्शित करने का अवसर मिला और मलेशियाई रक्षा उद्योग के साथ कारोबारी संपर्क मजबूत हुए।
भारत और मलेशिया के बीच बातचीत को केवल हथियारों की संभावित खरीद तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा। दोनों देशों के रिश्ते अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। व्यापार और निवेश के अलावा डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा, स्वास्थ्य और उभरती तकनीकों में भी सहयोग की संभावनाएं बढ़ रही हैं। मलेशिया भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साझेदार है, जबकि भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है।
रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का एक और महत्वपूर्ण पहलू मलेशिया की अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को विकसित करने की कोशिश है। ऐसे में भारत के लिए मलेशिया के साथ संयुक्त उत्पादन, तकनीकी सहयोग और रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी की संभावनाएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इससे भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया में अपने रक्षा उत्पादों के लिए बाजार विस्तार का अवसर मिलेगा और मलेशिया को प्रतिस्पर्धी कीमत पर आधुनिक रक्षा तकनीक तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी और अनवर इब्राहिम की इस बैठक के बाद किसी खास भारतीय हथियार प्रणाली की खरीद को लेकर अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसे किसी हथियार सौदे के अंतिम रूप लेने के बजाय दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण बातचीत के तौर पर देखना उचित होगा। आने वाले समय में अगर रक्षा उद्योग स्तर पर बातचीत आगे बढ़ती है, तो मलेशिया भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया का एक महत्वपूर्ण बाजार बन सकता है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मोदी और अनवर की यह मुलाकात भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और दक्षिण-पूर्व एशिया में रणनीतिक पहुंच के लिहाज से भी अहम है। दोनों देशों के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग, व्यापारिक रिश्ते और तकनीकी साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत-मलेशिया संबंधों को और नई दिशा दे सकते हैं।




