हनुमान अंश ने पर्दे पर रचा इतिहास, 40वें दिन भी कायम है दर्शकों का प्यार,छठे सप्ताह में भी सिनेमाघरों में भीड़ बरकरार

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श्रद्धा और आस्था में सराबोर कर रही है फिल्म

Reported by: निखिल रस्तोगी 

नई दिल्ली : महज 1.8 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म हनुमान अंश इस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर और सबसे ज़्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्मों में शामिल हो चुकी है। रिलीज़ के 40वें दिन और 6वें सप्ताह में भी फिल्म सिनेमाघरों में मजबूती से टिकी हुई है और दर्शकों का भरपूर प्यार बटोर रही है। भारत में फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 220 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है, जबकि दुनियाभर में इसकी कमाई 260 करोड़ रुपये के पार बताई जा रही है।

फिल्म की टीम

निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म नीम करोली बाबा के जीवन, उनकी हनुमान भक्ति और आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित है। बिना किसी बड़े स्टार, सीमित प्रचार और बेहद छोटे बजट के बावजूद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया है और साल 2026 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में अपनी जगह बनाई है।फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर, रागिनी एस. और नम्रता जी. सिंह हैं। फिल्म में शोभिनव सत्या ने नीम करोली बाबा का किरदार जीवंत किया है, सभी कलाकारों सहित वरिष्ठ अभिनेता अनिल रस्तोगी ने भी अपने अभिनय से जान डाल दी।

थिएटर बने कथास्थल, दर्शक बने भक्त 

हनुमान अंश सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए आस्था और भक्ति का अनुभव बन गई है।कई सिनेमाघरों में दर्शक श्रद्धा के साथ जूते-चप्पल उतारकर फिल्म देखते हैं,और कही पर तो फिल्म के समापन पर प्रसाद वितरण भी हुआ।जैसे ही “सीताराम… सीताराम…” की धुन गूंजती है, पूरे पिक्चर हॉल में भक्ति और ऊर्जा का संचार हो जाता है। दर्शक भी एक स्वर में “सीताराम… सीताराम…” का जाप करने लगते हैं। माहौल ऐसा बन जाता है मानो सिनेमाघर किसी कथा या सत्संग स्थल में बदल गया हो।फिल्म का संगीत भी दर्शकों के दिलों में उतर गया है। ” *जब ज़िद पर आ गई पार्वती”* और ” **मैने तेरे ही भरोसे हनुमान* “.. जैसे भजन सिनेमाघरों में दर्शक खुद गुनगुनाते नजर आते हैं और पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। इस गाने को नेत्रहीन सुनील लोधी ने अपनी आवाज दी है।

सालों बाद थिएटर लौटे पुराने दर्शक 

हमने जब कई दर्शकों से बात की तो उनका कहना था कि इस फिल्म ने उन्हें वर्षों बाद फिर से थिएटर तक पहुंचाया। कई परिवार ऐसे मिले जो 20 से 30 साल बाद अपने बच्चों के साथ सिनेमा देखने पहुंचे। बड़ी संख्या में लोगों ने यह फिल्म दो, तीन और उससे भी अधिक बार देखी है।एक दंपति ने कहा, “फिल्म देखने जाते हैं और भक्त बनकर बाहर आते हैं।”एक अन्य दर्शक ने बताया कि उन्होंने अपने लगभग पूरे परिवार को यह फिल्म दिखाई है और जो सदस्य अभी तक नहीं देख पाए हैं, उन्हें भी जल्द दिखाएंगे।

भक्ति, प्रेरणा और भावनाओं का संगम

दर्शकों के मुताबिक फिल्म के कई प्रसंग रोंगटे खड़े कर देते हैं और नीम करोली बाबा की महिमा से जुड़ाव का एहसास कराते हैं। खास तौर पर वह दृश्य, जब बाबा को ट्रेन से उतार दिया जाता है और ट्रेन आगे नहीं बढ़ती, दर्शकों को भावुक कर देता है और बाबा की महिमा का संदेश देता है।फिल्म में हनुमान चालीसा का अद्भुत फिल्मांकन लोगों को बेहद भावुक और भक्तिमय अनुभव देता है। कई दर्शकों की आंखें नम हो जाती हैं और पूरा हॉल भक्ति में डूब जाता है।फिल्म सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दर्शकों के भक्त बनने की भावना को भी जीवंत करती है। यही वजह है कि कम बजट में बनी हनुमान अंश की सफलता सिर्फ बॉक्स ऑफिस की कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों दर्शकों की आस्था, प्रेरणा और भावनात्मक जुड़ाव की भी मिसाल बन गई है।

कम बजट, लेकिन कहीं भी नहीं दिखती कोई कमी

करीब 1.8 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस फिल्म को देखकर कहीं भी ऐसा महसूस नहीं होता कि बजट कम था। विजुअल्स, संगीत, भावनात्मक प्रस्तुति और आध्यात्मिक वातावरण हर स्तर पर फिल्म बेहद प्रभावशाली नजर आती है। सीमित संसाधनों में बनी यह फिल्म इस बात का उदाहरण बन गई है कि मजबूत कहानी और सच्ची भावना दर्शकों के दिल तक पहुंच सकती है।

आखिर में मिला सीक्वल का संकेत

फिल्म के अंतिम दृश्य में मेकर्स ने कहानी को आगे बढ़ाने का संकेत भी दिया है, जिससे दर्शकों के बीच हनुमान अंश के सीक्वल को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। खास बात यह है कि फिल्म के सीक्वल की आधिकारिक घोषणा भी हो चुकी है, हालांकि अगले भाग पर काम अभी जारी है।हनुमान अंश ने यह साबित कर दिया कि जब कहानी में आस्था, भक्ति और भावनाओं का संगम हो, तो छोटा बजट भी बड़े-बड़े रिकॉर्ड बना सकता है। यही वजह है कि रिलीज़ के छह सप्ताह बाद भी यह फिल्म दर्शकों के दिलों और सिनेमाघरोंदोनों में मजबूती से कायम है।

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