उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित शास्त्रीनगर के चर्चित सेंट्रल मार्केट में बुधवार, 16 सितंबर 2026 को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में आवास एवं विकास परिषद की टीम ने सील किए गए व्यावसायिक परिसरों में अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। कार्रवाई को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। सेंट्रल मार्केट की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया।
प्रशासन की कार्रवाई के दायरे में कुल 44 सील किए गए भवन बताए जा रहे हैं। बुधवार को इनमें से छह भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। कार्रवाई शुरू होने से पहले ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। एडीएम सिटी, एसपी सिटी समेत आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुलडोजर से चिह्नित निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
सेंट्रल मार्केट का विवाद काफी समय से न्यायिक प्रक्रिया में है। मामले में आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों और भवनों में स्वीकृत मानकों के विपरीत निर्माण किए जाने का मुद्दा सामने आया था। आवास एवं विकास परिषद की ओर से कराए गए सर्वे में कई संपत्तियों में निर्धारित सेटबैक की जगह पर निर्माण और अन्य अनधिकृत बदलाव पाए जाने की बात सामने आई थी। इसी मामले को लेकर लंबे समय से कानूनी कार्रवाई चल रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 2026 को मामले में 44 सील व्यावसायिक परिसरों से संबंधित ध्वस्तीकरण कार्रवाई का आदेश दिया था। अदालत के निर्देश के अनुसार संबंधित संपत्ति मालिकों को अपने स्तर पर अवैध निर्माण हटाने का अवसर दिया गया था। निर्धारित अवधि में निर्माण नहीं हटाए जाने की स्थिति में आवास एवं विकास परिषद को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही इस कार्रवाई में आने वाले खर्च को संबंधित संपत्ति मालिकों से वसूलने की बात भी आदेश में कही गई थी।
आवास एवं विकास परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार, 44 सील भूखंडों में से कुछ परिसरों में सेटबैक से जुड़े अवैध निर्माण पहले ही हटाए जा चुके थे। रिपोर्टों के मुताबिक 16 परिसरों में अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया पूरी हो गई थी, जबकि 28 भूखंडों के मामले में कार्रवाई बाकी थी। इसके बाद परिषद ने अदालत के आदेश के अनुपालन में शेष निर्माणों के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया।
कार्रवाई से पहले सेंट्रल मार्केट में कारोबार करने वाले व्यापारियों के बीच भी हलचल तेज हो गई थी। कई व्यापारी अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों से सामान निकालते नजर आए। ध्वस्तीकरण की आशंका के कारण दुकानदारों ने अपनी व्यापारिक सामग्री को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कोशिश की। वहीं प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए क्षेत्र में आवाजाही पर नियंत्रण रखा।
बुधवार सुबह से ही सेंट्रल मार्केट के प्रमुख रास्तों पर पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी दिखाई दी। कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए और लोगों को कार्रवाई वाले क्षेत्र में जाने से रोका गया। सुरक्षा व्यवस्था के कारण स्थानीय लोगों और व्यापारियों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान मीडिया कर्मियों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। आसपास के रास्तों से गुजरने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ा।
मामले में 21 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई प्रस्तावित है। इस दौरान अब तक की गई कार्रवाई की स्थिति अदालत के सामने रखी जानी है। ऐसे में 16 सितंबर से शुरू हुआ ध्वस्तीकरण अभियान मामले की अगली न्यायिक कार्यवाही से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में बाकी सील भवनों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई किस तरह आगे बढ़ती है, इस पर व्यापारियों और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।
सेंट्रल मार्केट प्रकरण में मौजूदा कार्रवाई का मुख्य आधार अदालत के आदेश और आवास एवं विकास परिषद की ओर से चिन्हित किए गए अनधिकृत निर्माण हैं। प्रशासन का अभियान निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि संबंधित संपत्तियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ रहा है। 21 सितंबर की सुनवाई में ध्वस्तीकरण अभियान की प्रगति और शेष संपत्तियों को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।




