ट्रंप के रुख से बढ़ा ईरान पर खतरा, विदेश मंत्री अराघची ने युद्ध को लेकर किया बड़ा दावा

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना के संकेत दिए जाने के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कड़ा रुख अपनाया है। अराघची ने कहा है कि यदि अमेरिका फिर से युद्ध शुरू करता है तो ईरान उसका सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका देश कूटनीति का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता और बातचीत के जरिए समाधान की संभावना अभी बनी हुई है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच ईरान ने संघर्ष को समाप्त करने और आगे की बातचीत के लिए सात दिन का एक प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी स्थिति, अमेरिकी सैन्य नाकाबंदी, तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में राहत और परमाणु वार्ता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया था। ईरान की ओर से संकेत दिया गया था कि कुछ शर्तों पर सहमति बनने की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और बातचीत को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की इस पहल को स्वीकार नहीं किया, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया।

ट्रंप का रुख इस पूरे घटनाक्रम में खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने पहले भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है और हालिया बयानों में यह संकेत दिया है कि यदि दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं होता है तो अमेरिका सैन्य विकल्प पर आगे बढ़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए शांति समझौता नहीं होने पर गंभीर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। हालांकि, इसके साथ ही अमेरिकी पक्ष की ओर से ईरान के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रहने के संकेत भी मिलते रहे हैं। इससे यह स्पष्ट है कि फिलहाल सैन्य और कूटनीतिक दोनों विकल्प खुले हुए हैं।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनका देश किसी भी नए हमले का सामना करने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करता है तो ईरान उसका जवाब देगा। अराघची ने संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका के बीच ईरान की सैन्य तैयारियों का संकेत दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उनका देश कूटनीतिक समाधान की संभावना को खत्म नहीं करना चाहता। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि तेहरान एक तरफ संभावित सैन्य टकराव के लिए तैयार रहने की रणनीति अपना रहा है, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के जरिए संकट को नियंत्रित करने की कोशिश भी जारी रखना चाहता है।

ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि उसे अमेरिकी प्रस्ताव पर अभी औपचारिक और स्पष्ट जवाब का इंतजार है। तेहरान के अनुसार, मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका तक संदेश पहुंचाए गए हैं और बातचीत की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य प्रमुख मुद्दों को लेकर उसकी शर्तें स्पष्ट हैं। ईरानी नेतृत्व ने संकेत दिया है कि बातचीत संभव है, लेकिन वह सैन्य दबाव या धमकी की स्थिति में किसी समझौते को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

इस विवाद में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बन गया है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या समुद्री यातायात में रुकावट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहने की आशंका जताई जा रही है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले ही इस घटनाक्रम को लेकर संवेदनशील बना हुआ है और संघर्ष बढ़ने की स्थिति में तेल की कीमतों तथा समुद्री परिवहन पर दबाव बढ़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद की स्थिति कमजोर होने के बावजूद कई देश दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। कतर और पाकिस्तान समेत कुछ क्षेत्रीय देशों की भूमिका इस संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मध्यस्थों के जरिए दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है और अप्रत्यक्ष बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस प्रयास का उद्देश्य संघर्ष को और बढ़ने से रोकना तथा किसी संभावित समझौते के लिए आधार तैयार करना है।

फिलहाल स्थिति यह है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही सार्वजनिक रूप से कड़ा रुख अपना रहे हैं, लेकिन बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ट्रंप की ओर से ईरान पर दोबारा कार्रवाई के संकेत और अराघची की ओर से युद्ध की स्थिति में जवाब देने की चेतावनी ने तनाव को बढ़ा दिया है। वहीं, मध्यस्थ देशों के प्रयास और दोनों पक्षों की ओर से बातचीत के लिए दरवाजा खुला रखने के संकेत यह बताते हैं कि कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।

आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत किस दिशा में जाती है, यह इस संकट के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति, अमेरिकी सैन्य गतिविधियां और ईरान की प्रतिक्रिया भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर में रहेंगी। यदि बातचीत के जरिए सहमति बनती है तो तनाव कम करने का रास्ता खुल सकता है, लेकिन यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं और सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होती है तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

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