नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान विषय की नई किताब जारी की है। नई पुस्तक में भारतीय इतिहास, शासन व्यवस्था, सार्वजनिक नीति, नागरिक जिम्मेदारी, व्यक्तिगत वित्त, उद्यमिता और भारत की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े कई विषयों को शामिल किया गया है। किताब में सेंगोल से लेकर चोल राजवंश, संसद, सुशासन और सार्वजनिक नीति तक के विषयों को विद्यार्थियों के सामने नए संदर्भ में रखा गया है। नई पुस्तक को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुरूप तैयार किए जा रहे नए पाठ्यक्रम का हिस्सा बताया गया है।
नई किताब में सेंगोल को विशेष स्थान दिया गया है। सेंगोल को भारतीय शासन परंपरा और सुशासन के प्रतीक के रूप में समझाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में इसे चोल राजवंश की ऐतिहासिक परंपराओं से जोड़ते हुए सत्ता, न्याय, कर्तव्य और धर्मसम्मत शासन जैसी अवधारणाओं का उल्लेख किया गया है। विद्यार्थियों को यह समझाने की कोशिश की गई है कि प्राचीन और मध्यकालीन भारत में शासन व्यवस्था को केवल सत्ता हासिल करने की प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जाता था, बल्कि शासक के कर्तव्यों और न्यायपूर्ण शासन की अवधारणा से भी जोड़ा जाता था।
सेंगोल के आधुनिक इतिहास का भी किताब में उल्लेख किया गया है। इसमें 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय सेंगोल से जुड़ी परंपरा और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को इसे सौंपे जाने के प्रसंग को शामिल किया गया है। इसके बाद 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, 1947 में सेंगोल की भूमिका और सत्ता हस्तांतरण से जुड़े दावों को लेकर राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस भी हुई है। अलग-अलग राजनीतिक पक्षों ने इस प्रसंग की अलग-अलग व्याख्या की है। इसलिए सेंगोल का यह अध्याय इतिहास, परंपरा और आधुनिक राजनीतिक विमर्श के बीच एक महत्वपूर्ण अध्ययन विषय बन गया है।
पुस्तक में सेंगोल के शीर्ष पर मौजूद नंदी के प्रतीकात्मक महत्व का भी संदर्भ दिया गया है। सेंगोल को भारतीय राजपरंपरा में शासन की जिम्मेदारी और न्यायपूर्ण व्यवस्था से जोड़कर समझाया गया है। इस तरह विद्यार्थियों को एक ओर प्राचीन भारतीय राजकीय परंपराओं के बारे में जानकारी दी जाती है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक भारत की लोकतांत्रिक संसद के संदर्भ में भी इस प्रतीक को समझने का अवसर मिलता है।
नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘Governance and Public Policy’ यानी ‘शासन और सार्वजनिक नीति’ है। इस अध्याय में विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि सरकार और शासन व्यवस्था किस प्रकार काम करती है तथा सार्वजनिक नीतियां किस तरह नागरिकों के जीवन को प्रभावित करती हैं। इसमें अच्छे शासन यानी Good Governance से जुड़े कई सिद्धांतों पर चर्चा की गई है। इनमें भागीदारी, कानून का शासन, जवाबदेही, प्रभावशीलता, समावेशिता, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता जैसे पहलू शामिल हैं।
किताब में शासन को केवल सरकार के कामकाज तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि नागरिकों की भूमिका को भी इससे जोड़ा गया है। विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नीतियों का निर्माण, उनका क्रियान्वयन, संस्थाओं की जवाबदेही और नागरिकों की भागीदारी एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। इस दृष्टिकोण से छात्रों को शासन व्यवस्था को केवल परीक्षा के विषय के रूप में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन से जुड़े मुद्दे के रूप में समझाने की कोशिश की गई है।
नई किताब में ‘सत्यमेव जयते’ और ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ जैसे राष्ट्रीय और संस्थागत आदर्श वाक्यों का भी संदर्भ मिलता है। ‘सत्यमेव जयते’ को मुंडक उपनिषद से जोड़ा गया है, जबकि ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ को महाभारत से संबंधित बताया गया है। इन उदाहरणों के जरिए विद्यार्थियों को भारत की ऐतिहासिक, दार्शनिक और संस्थागत परंपराओं के बीच संबंध समझाने का प्रयास किया गया है।
इतिहास के हिस्से में भी नई किताब में कई बदलाव देखने को मिलते हैं। ‘Resistance and Resilience’ यानी ‘प्रतिरोध और लचीलापन’ जैसे विषय के माध्यम से 1000 से 1700 ईस्वी के बीच भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हुए संघर्षों और प्रतिरोध की घटनाओं पर चर्चा की गई है। इसमें क्षेत्रीय शक्तियों, स्थानीय समुदायों और विभिन्न ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की भूमिका को सामने लाने का प्रयास किया गया है। असम के अहोम राज्य और सरायघाट के युद्ध सहित सिख गुरुओं, खालसा और दक्षिण भारत की विभिन्न शक्तियों से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को भी स्थान दिया गया है।
इस बदलाव के जरिए इतिहास को केवल दिल्ली और उत्तर भारत की राजनीतिक घटनाओं तक सीमित रखने के बजाय भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की ऐतिहासिक भूमिका को भी सामने लाने की कोशिश की गई है। हालांकि, इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में किन घटनाओं को कितना महत्व दिया जाए और उनकी व्याख्या किस प्रकार की जाए, यह विषय अकादमिक क्षेत्र के साथ-साथ सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का भी हिस्सा रहा है।
नई किताब में विद्यार्थियों को व्यक्तिगत वित्त की बुनियादी जानकारी देने पर भी जोर दिया गया है। ‘Managing Your Personal Finances’ अध्याय के माध्यम से आय, कर और व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों को समझाने का प्रयास किया गया है। इसमें आयकर की गणना और नई कर व्यवस्था से जुड़े उदाहरणों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को कम उम्र में ही वित्तीय निर्णयों, कर व्यवस्था और नागरिक जिम्मेदारी की बुनियादी समझ देना है।
किताब में उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण से जुड़ा उदाहरण भी शामिल किया गया है। इसके लिए लिज्जत पापड़ की कहानी को इस्तेमाल किया गया है। 1959 में मुंबई में सात महिलाओं द्वारा शुरू किए गए इस छोटे से प्रयास के विस्तार के जरिए विद्यार्थियों को सामूहिक उद्यम, महिला भागीदारी, व्यवसाय संचालन और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को समझाने की कोशिश की गई है। यह उदाहरण बताता है कि सीमित संसाधनों से शुरू किया गया सामूहिक प्रयास किस तरह एक बड़े कारोबारी मॉडल का रूप ले सकता है।
नई पुस्तक में अध्यायों की संरचना में भी बदलाव किया गया है। शासन और सार्वजनिक नीति को नए तरीके से शामिल किया गया है, जबकि ‘India and the World’ जैसे विषय को कक्षा 10 में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी सामने आई है। पाठ्यक्रम में किए गए इन बदलावों का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी कक्षा के स्तर के अनुरूप इतिहास, नागरिक शास्त्र, अर्थव्यवस्था और समकालीन सामाजिक मुद्दों की व्यापक समझ प्रदान करना बताया गया है।
कुल मिलाकर, कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में इतिहास और नागरिक शास्त्र को कई व्यावहारिक विषयों के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। सेंगोल और चोल राजवंश से लेकर आधुनिक संसद, सुशासन, सार्वजनिक नीति, ऐतिहासिक प्रतिरोध, आयकर, व्यक्तिगत वित्त और उद्यमिता तक के विषय एक ही पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं। नई किताब के जरिए विद्यार्थियों को भारत के अतीत के साथ-साथ वर्तमान शासन व्यवस्था, नागरिक जिम्मेदारियों और आर्थिक जीवन को समझने का अवसर देने की कोशिश की गई है।




