भारत में होगी बिम्सटेक की अहम बैठक, बांग्लादेश के गृह मंत्री की गैरमौजूदगी से बढ़ी चर्चा

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भारत और बांग्लादेश के बीच जारी कूटनीतिक तनाव के बीच बिम्सटेक (BIMSTEC) गृह मंत्रियों की बैठक को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद नई दिल्ली में 13 अक्टूबर 2026 को होने वाली इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह बांग्लादेश का प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में बैठक में हिस्सा लेगा। बांग्लादेश के इस फैसले को दोनों देशों के बीच मौजूदा संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है। इससे पहले सितंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भी बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान शामिल नहीं हुए थे। लगातार दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में बांग्लादेश के शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी ने भारत और बांग्लादेश के संबंधों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।

नई दिल्ली में आयोजित होने वाली बिम्सटेक गृह मंत्रियों की बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि आतंकवाद, सीमा पार अपराध, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित आपराधिक गतिविधियों जैसी चुनौतियों पर चर्चा कर सकते हैं। बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देना है। बैठक से पहले 12 अक्टूबर को अधिकारियों के स्तर पर चर्चा निर्धारित है, जबकि 13 अक्टूबर को मंत्री स्तर की बैठक आयोजित की जानी है। भारत के गृह मंत्री अमित शाह इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा के माध्यम से हुई थी। इसका पूरा नाम बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन है। संगठन में भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार, आर्थिक विकास, तकनीकी सहयोग, परिवहन संपर्क और क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देना है। बिम्सटेक भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।

बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद के बैठक में शामिल नहीं होने के पीछे का सटीक आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं है। हालांकि, भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ समय से जारी राजनीतिक और कूटनीतिक मतभेदों को इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि के रूप में देखा जा रहा है। बांग्लादेश की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय यह दर्शाता है कि देश बैठक में अपनी भागीदारी बनाए रखेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में मंत्री की गैरमौजूदगी को बांग्लादेश के पूरी तरह बैठक से अलग होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

बैठक में भारत के अलावा भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इन देशों के गृह मंत्री या संबंधित मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। रिपोर्टों के अनुसार, प्रमुख प्रतिनिधियों में भारत के गृह मंत्री अमित शाह, भूटान के गृह मंत्री लुंगटेन दोर्जी, म्यांमार के गृह मंत्री जनरल को को ऊ, नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग, श्रीलंका के गृह मंत्री चंदना अभयरत्ने और थाईलैंड के उप गृह मंत्री सोंगसाक थोंगस्री के नाम शामिल हैं। बांग्लादेश की ओर से मंत्री के बजाय वरिष्ठ अधिकारी बैठक में हिस्सा लेंगे। प्रतिनिधियों की अंतिम सूची की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही सभी नामों को अंतिम रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

इस बैठक में आतंकवाद से निपटने के लिए साझा रणनीति तैयार करना प्रमुख विषयों में शामिल हो सकता है। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सीमा पार अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी समस्याएं कई सदस्य देशों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए देशों के बीच खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक है। भारत इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण बिम्सटेक के सुरक्षा सहयोग को महत्वपूर्ण मानता है। बैठक में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा होने की संभावना है।

बांग्लादेश के गृह मंत्री की गैरमौजूदगी को सितंबर 2026 में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से जुड़े घटनाक्रम के साथ भी जोड़कर देखा जा रहा है। उस समय बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान नई दिल्ली में आयोजित आउटरीच सत्र में शामिल नहीं हुए थे। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने उस समय कहा था कि निमंत्रण बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में दिया गया था। बांग्लादेश का पक्ष था कि प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के लिए अलग द्विपक्षीय निमंत्रण और सकारात्मक कूटनीतिक माहौल आवश्यक है। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद को लेकर सवाल खड़े किए थे।

भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव के पीछे कई मुद्दे हैं। इनमें बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और उनके प्रत्यर्पण की मांग भी शामिल है। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। इसके बाद से बांग्लादेश की ओर से उनकी वापसी की मांग उठाई जाती रही है। इस विषय पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त राजनीतिक बयानबाजी और विभिन्न कूटनीतिक घटनाक्रमों ने भी द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया है। हालांकि, बांग्लादेश के गृह मंत्री के बैठक में शामिल नहीं होने के फैसले को किसी एक मुद्दे का सीधा परिणाम बताने के लिए पर्याप्त आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

बांग्लादेश बिम्सटेक का संस्थापक सदस्य है और अप्रैल 2025 से संगठन की अध्यक्षता कर रहा है। संगठन का सचिवालय भी ढाका में स्थित है। ऐसे में बांग्लादेश की भूमिका क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद दोनों देश व्यापार, सीमा प्रबंधन, संपर्क मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। बिम्सटेक जैसे बहुपक्षीय मंच इन मुद्दों पर संवाद बनाए रखने का अवसर प्रदान करते हैं। इसलिए बांग्लादेश के गृह मंत्री की गैरमौजूदगी के बावजूद उसके प्रतिनिधिमंडल का बैठक में शामिल होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, नई दिल्ली में होने वाली बिम्सटेक गृह मंत्रियों की बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है, जब भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। बांग्लादेश के गृह मंत्री की अनुपस्थिति राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय जरूर है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला यह संकेत देता है कि बांग्लादेश क्षेत्रीय मंच पर अपनी भागीदारी बनाए रखना चाहता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैठक में सुरक्षा सहयोग के मुद्दों पर कितनी प्रगति होती है और क्या इसके माध्यम से सदस्य देशों के बीच संवाद और समन्वय को मजबूत करने में मदद मिलती है।

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