असम में ड्रग तस्करों की शामत! अमित शाह ने CM हिमंत और पुलिस की कार्रवाई को सराहा

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असम में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए गए अभियान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम पुलिस की सराहना की है। राज्य में नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए की गई कार्रवाई के दौरान 547 मामले दर्ज किए गए और 945 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, 182 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए। गृह मंत्री ने इस कार्रवाई को ड्रग नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार बताते हुए नशे के अवैध कारोबार को खत्म करने और युवाओं को नशे से बचाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस अभियान को असम में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध बिक्री के खिलाफ चल रही कार्रवाई की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

असम में नशे के खिलाफ कार्रवाई का दायरा केवल गिरफ्तारियों और मादक पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं रहा। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, राज्य में 703 से अधिक ड्रग हॉटस्पॉट पर छापेमारी की गई। इसके साथ ही नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। लगभग 31 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने, कुर्क करने या फ्रीज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य कथित तस्करों के आर्थिक आधार को कमजोर करना और अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। सरकार की रणनीति में अब केवल तस्करों को गिरफ्तार करना ही नहीं, बल्कि उनके नेटवर्क को आर्थिक रूप से भी कमजोर करना शामिल है।

अभियान के दौरान पुलिस ने 73 गैर-जमानती वारंट तामील किए और 47 फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों से जुड़े 10 आरोपी भी शामिल बताए गए हैं। इसके अतिरिक्त, मादक पदार्थों की अवैध तस्करी रोकने से संबंधित कानून के तहत 157 प्रस्तावों पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इन कदमों से संकेत मिलता है कि पुलिस ने नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी के साथ-साथ फरार आरोपियों की तलाश और कानूनी कार्रवाई पर भी ध्यान केंद्रित किया है। अधिकारियों के सामने अब इन मामलों की जांच पूरी करने और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।

नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान के तहत तंबाकू उत्पादों और शराब से संबंधित मामलों में भी कार्रवाई की गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम के तहत 2,229 छापे मारे गए। इसके अलावा, 3,662 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और 2,943 शैक्षणिक संस्थानों का सर्वेक्षण किया गया। अभियान के दौरान भारतीय निर्मित विदेशी शराब समेत कुल 1,34,539 लीटर शराब जब्त की गई या नष्ट की गई। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य अवैध बिक्री पर नियंत्रण मजबूत करना और ऐसे कारोबार पर निगरानी बढ़ाना है, जो युवाओं तथा आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

असम सरकार ने नशे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रमों पर भी जोर दिया है। उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार, अभियान के तहत 633 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 1,12,532 नागरिकों और विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई गई। इन कार्यक्रमों में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने और युवाओं को मादक पदार्थों से दूर रहने के लिए प्रेरित करने पर ध्यान दिया गया। नशे की समस्या से निपटने के लिए जागरूकता को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि केवल कानूनी कार्रवाई से इस समस्या का पूरी तरह समाधान करना मुश्किल है। इसके साथ परिवारों की भागीदारी, शिक्षा, समय पर उपचार और पुनर्वास की सुविधाएं भी जरूरी हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने इस अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशा मुक्त भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए नारकोटिक्स नियंत्रण से संबंधित विजन दस्तावेज 2026-29 का भी उल्लेख किया। सरकार की रणनीति में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को ध्वस्त करना, अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों पर कार्रवाई करना और युवाओं को नशे की लत से बचाना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इस दृष्टिकोण के तहत पुलिस और संबंधित एजेंसियों को तस्करी के स्रोतों, आपूर्ति मार्गों और आर्थिक नेटवर्क की पहचान करने पर ध्यान देना होता है। असम जैसे पूर्वोत्तर राज्य में यह रणनीति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण सीमापार तस्करी और अंतरराज्यीय नेटवर्क की निगरानी एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।

इसी बीच, असम के कछार जिले में भी मादक पदार्थों की बड़ी खेप बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, पुलिस ने एक ट्रक के गुप्त केबिन से लगभग 2.3 लाख याबा गोलियां बरामद कीं, जिनकी अनुमानित कीमत 57.5 करोड़ रुपये बताई गई। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। याबा एक प्रकार की नशीली गोली है, जिसमें आम तौर पर मेथामफेटामाइन और कैफीन जैसे पदार्थ पाए जाते हैं। इस बरामदगी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के सामने मौजूद चुनौतियों को एक बार फिर उजागर किया है। हालांकि, इस मामले की बरामदगी को राज्यव्यापी अभियान के कुल आंकड़ों से अलग समझना जरूरी है, क्योंकि उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि इसका मूल्य 182 करोड़ रुपये की कुल जब्ती में शामिल है या नहीं।

असम में नशे के खिलाफ अभियान को लेकर अमित शाह की सराहना से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और राज्य पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक तथा प्रशासनिक समर्थन मिला है। हालांकि, अभियान की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मामलों की जांच कितनी प्रभावी ढंग से पूरी होती है, तस्करी के नेटवर्क को किस हद तक तोड़ा जाता है और अवैध कारोबार से जुड़ी संपत्तियों पर कानूनी कार्रवाई कितनी सफल रहती है। इसके साथ ही नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करना भी आवश्यक होगा।

कुल मिलाकर, असम में नशे के खिलाफ अभियान के दौरान 547 मामले दर्ज होना, 945 गिरफ्तारियां, 182 करोड़ रुपये से अधिक के मादक पदार्थों की जब्ती और 703 से अधिक हॉटस्पॉट पर कार्रवाई महत्वपूर्ण आंकड़े हैं। लगभग 31 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया और बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम भी इस अभियान का हिस्सा रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखने का संदेश दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और संबंधित एजेंसियां आगे किस तरह तस्करी के नेटवर्क को कमजोर करती हैं और राज्य में नशे की उपलब्धता पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करती हैं।

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