नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस सम्मेलन में भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, वेदांत दर्शन और भगवद्गीता की शिक्षाओं को व्यापक स्तर पर पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इस आयोजन में देश-विदेश से आध्यात्मिक विचारकों, मिशन के सदस्यों, युवाओं और अनुयायियों के शामिल होने की उम्मीद है। सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ना तथा समाज में नैतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से जुड़ा प्रमुख संदेश युवाओं की भूमिका और देश के भविष्य में उनके योगदान को लेकर है। युवाओं को राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति मानते हुए शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार, उद्यमिता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। भारत की युवा आबादी देश के विकास को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। ऐसे में युवाओं को अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना राष्ट्रीय विकास की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है। भारतीय दर्शन और भगवद्गीता की शिक्षाएं भी युवाओं को अनुशासन, कर्तव्य पालन, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित करती हैं।
चिन्मय मिशन की स्थापना वर्ष 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी। मिशन का मुख्य उद्देश्य वेदांत दर्शन और भगवद्गीता के ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाना है। पिछले सात दशकों से अधिक समय में संगठन ने आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण, सामाजिक सेवा और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया है। मिशन की शिक्षाओं में आत्मज्ञान, आत्मसंयम, कर्तव्य और मानवीय मूल्यों को विशेष महत्व दिया जाता है। 75 वर्षों की यात्रा के दौरान संगठन ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक विचारों के प्रसार में योगदान दिया है।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित यह वैश्विक सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। तीन दिवसीय कार्यक्रम में आध्यात्मिक सत्रों, वैदिक मंत्रोच्चार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भारतीय दर्शन पर आधारित चर्चाओं को शामिल किया गया है। सम्मेलन के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने अनुभव साझा करने, चिन्मय मिशन की उपलब्धियों पर चर्चा करने और भविष्य की योजनाओं पर विचार करने का अवसर मिलेगा। अद्वैत दर्शन, आध्यात्मिक जागरूकता और विश्व स्तर पर आपसी समझ को बढ़ावा देने जैसे विषय भी इस आयोजन के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं।
चिन्मय मिशन के 75वें वर्ष के समारोहों के दौरान भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कई पहल की गईं। इनमें ‘गीता पंचामृत’ प्रमुख है, जिसके माध्यम से भगवद्गीता के पांच चुनिंदा श्लोकों की शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसके अतिरिक्त ‘चिन्मय गीता समर्पण’ कार्यक्रम के अंतर्गत दुनिया भर के एक लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक पाठ किया। इन गतिविधियों ने डिजिटल माध्यमों के जरिए आध्यात्मिक शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी बढ़ाने की संभावनाओं को भी सामने रखा।
युवाओं को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विचारों से जोड़ने के लिए चिन्मय मिशन की ओर से ‘चिन्मय युवा केंद्र’ के सदस्यों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपलब्ध कार्यक्रम संबंधी जानकारी के अनुसार, 15 युवा सदस्यों ने ‘चिन्मय अमृत यात्रा’ के तहत देशभर में भ्रमण कर भगवद्गीता और स्वामी चिन्मयानंद के विचारों का संदेश पहुंचाया। इस यात्रा में 40 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की गई। इस पहल का उद्देश्य युवाओं के बीच भारतीय दर्शन के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जोड़ना था।
चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का महत्व केवल एक वर्षगांठ समारोह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय दर्शन और आधुनिक समाज की आवश्यकताओं के बीच संवाद स्थापित करने का अवसर भी है। भगवद्गीता में कर्म, कर्तव्य, आत्मसंयम और जिम्मेदारी से जुड़े विचारों को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी माना जाता है। इन मूल्यों को शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों से जोड़कर युवाओं के व्यक्तित्व विकास में भी योगदान दिया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मेलन का उद्घाटन चिन्मय मिशन के 75 वर्षों के योगदान को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर है। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण, युवाओं की भागीदारी और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रसार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सम्मेलन के समापन के साथ मिशन की अब तक की यात्रा की समीक्षा करने और भविष्य में आध्यात्मिक शिक्षा तथा सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की दिशा में नए विचारों पर चर्चा होने की उम्मीद है।




