पृथ्वी की निगरानी में नया अध्याय: निसार करेगा हर 12 दिन में दो बार स्कैन

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज एक ऐतिहासिक मिशन की शुरुआत करने जा रहा है — NISAR मिशन (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar)। यह मिशन न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पृथ्वी की निगरानी के लिए अब तक की सबसे सटीक सैटेलाइट तकनीकों में से एक है। खास बात यह है कि यह सैटेलाइट हर 12 दिन में दो बार पृथ्वी की पूरी सतह को स्कैन करेगा, जिससे जलवायु परिवर्तन, वनस्पति, बर्फ की स्थिति और भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी संभव होगी।

क्या है NISAR मिशन?

NISAR मिशन एक संयुक्त परियोजना है जिसे ISRO और NASA ने मिलकर विकसित किया है। इसका पूरा नाम है NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar. यह दुनिया का पहला सैटेलाइट है जो दोहरी फ्रीक्वेंसी रडार (L-बैंड और S-बैंड) का उपयोग करके पृथ्वी की सतह की उच्च-सटीकता से निगरानी करेगा।

मिशन की मुख्य विशेषताएं:

हर 12 दिन में दो बार स्कैनिंग: यह सैटेलाइट हर 12 दिन के अंतराल पर पूरी पृथ्वी की सतह को दो बार स्कैन करेगा, जिससे वैज्ञानिकों को सतह के छोटे से छोटे बदलावों की जानकारी मिल सकेगी।

आपदा प्रबंधन में मदद: भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और ग्लेशियरों के पिघलने जैसे प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी और प्रभावों का विश्लेषण करने में मदद मिलेगी।

कृषि और पर्यावरण पर नजर: यह मिशन फसल की स्थिति, मिट्टी की नमी, वनस्पति के बदलाव और वन क्षेत्रों की निगरानी में भी उपयोगी साबित होगा।

जलवायु परिवर्तन पर सटीक डेटा: धरती की सतह में हो रहे बदलावों को मापकर यह मिशन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

सैटेलाइट की तकनीकी खूबियां:

L-बैंड और S-बैंड रडार: यह सैटेलाइट दो तरह की रडार तरंगों का इस्तेमाल करेगा – NASA द्वारा विकसित L-बैंड और ISRO द्वारा तैयार S-बैंड। दोनों मिलकर अत्यधिक सटीक आंकड़े प्रदान करेंगे।

24×7 निगरानी क्षमता: NISAR दिन और रात, बादलों के ऊपर से भी पृथ्वी की सतह की तस्वीरें ले सकता है, जिससे किसी भी मौसम में डेटा एकत्र करना संभव होगा।

लॉन्च स्थान: यह सैटेलाइट ISRO के GSLV Mark-II या Mark-III रॉकेट से श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जा सकता है।

वैश्विक महत्व क्यों रखता है यह मिशन?

NISAR मिशन का उद्देश्य न केवल भारत की भौगोलिक स्थितियों की निगरानी करना है, बल्कि यह पूरी दुनिया की सतह पर हो रहे परिवर्तनों पर नजर रखने में सहायक होगा। दुनिया भर के वैज्ञानिक, पर्यावरणविद् और नीति निर्माता इस डेटा का उपयोग जलवायु नीति और आपदा प्रबंधन की रणनीतियों में करेंगे।

भारत के लिए क्यों है यह खास?

भारत में जलवायु परिवर्तन, कृषि, बाढ़, भूकंप और वन संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सटीक डेटा की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। NISAR मिशन इन सभी जरूरतों को पूरा करेगा और देश के वैज्ञानिकों को उन्नत रिसर्च के लिए आवश्यक सूचनाएं देगा।

निष्कर्ष:

ISRO और NASA की यह साझेदारी भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के लिए एक नया मील का पत्थर है। NISAR मिशन से न केवल पृथ्वी की निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक तकनीकी नेतृत्व भी प्राप्त होगा। यह मिशन आने वाले वर्षों में पृथ्वी और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में बेहद सहायक सिद्ध होगा।

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