लखनऊ: लखनऊ के सबसे पॉश इलाकों में से एक गोमती नगर में स्थित वह सरकारी कोठी, जो कभी समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को आवंटित की गई थी, अब पार्टी के पास नहीं रहेगी। राज्य संपत्ति विभाग ने यह कोठी खाली कराने का नोटिस जारी कर दिया है।
क्या है मामला?
यह कोठी लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित है, जो लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव के आवास के रूप में इस्तेमाल होती रही। मुलायम सिंह के निधन के बाद यह संपत्ति अब नियमों के तहत सरकार को वापस सौंपी जानी है, क्योंकि यह ‘राज्य अतिथि’ की श्रेणी में आवंटित की गई थी।
वर्तमान में सपा द्वारा इस कोठी का उपयोग पार्टी दफ्तर और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
किराया सिर्फ ₹250 प्रति माह!
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, इस कोठी का किराया महज ₹250 प्रति माह तय किया गया था। यह किराया राजधानी के सबसे महंगे रिहायशी इलाकों में स्थित इस आलीशान कोठी के लिए बेहद कम माना जा रहा है। यही कारण है कि कई विपक्षी दलों ने इस रियायती आवंटन को लेकर समय-समय पर सवाल उठाए थे।
कोठी की स्थिति और मूल्य
स्थान: विक्रमादित्य मार्ग, गोमती नगर, लखनऊ
क्षेत्रफल: लगभग 1,500 वर्ग मीटर से अधिक
मूल्य: यदि बाज़ार दर पर आंका जाए तो करोड़ों रुपये की कीमत वाली संपत्ति
विशेषताएं: उच्च सुरक्षा व्यवस्था, सरकारी सुविधाएं, बड़े लॉन, मीटिंग हॉल आदि
राज्य संपत्ति विभाग की कार्रवाई
राज्य संपत्ति विभाग ने समाजवादी पार्टी को नोटिस जारी कर यह कोठी खाली करने का आदेश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि अब यह संपत्ति नियमों के अनुसार दूसरे पात्र व्यक्ति को आवंटित की जाएगी या फिर इसका पुनर्निर्धारण होगा।
राज्य संपत्ति अधिकारी के अनुसार, “यह आवंटन ‘व्यक्तिगत उपयोग’ के लिए था, पार्टी कार्यालय या राजनीतिक गतिविधियों के लिए नहीं। अब जब मुलायम सिंह यादव नहीं रहे, तो नियमों के तहत संपत्ति को खाली कराना आवश्यक है।”
सपा की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे इस कोठी को खाली करने की प्रक्रिया पर विचार कर रहे हैं और जल्द ही कोई वैकल्पिक स्थान तलाशा जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
बीजेपी और कांग्रेस जैसे दलों ने इस मामले पर तंज कसते हुए कहा कि इस तरह की ‘रियायती संपत्तियों’ का उपयोग राजनीतिक पार्टियों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे ‘सत्ता के दुरुपयोग’ की श्रेणी में बताया है।
क्या कहता है नियम?
राजनीतिक हस्तियों को उनके कार्यकाल के दौरान राज्य संपत्ति विभाग की ओर से आवास उपलब्ध कराए जाते हैं, लेकिन सेवा समाप्त होने या निधन की स्थिति में उन्हें यह संपत्ति वापस करनी होती है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में सख्त निर्देश दिए हैं कि सेवानिवृत्त या दिवंगत नेताओं के नाम पर आवंटन जारी नहीं रखा जा सकता।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह घटना एक प्रतीकात्मक बदलाव मानी जा रही है। यह केवल एक कोठी के खाली होने की खबर नहीं, बल्कि सत्ता और व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक आवश्यक कदम है। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी इस मामले को किस तरह संभालती है और आगे कौन इस आलीशान कोठी का अगला निवासी बनता है।




