झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री और आदिवासी समाज के मुखर नेता शिबू सोरेन का निधन हो गया है।
वे 80 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका इलाज रांची के एक निजी अस्पताल में चल रहा था, जहाँ उन्होंने अंतिम
‘गुरुजी’ के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन ने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया। उन्होंने न सिर्फ राजनीतिक मोर्चे पर लड़ाई लड़ी, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी आदिवासी पहचान को मजबूत किया।
उनकी अगुवाई में झारखंड मुक्ति मोर्चा एक जन आंदोलन बन गया, जिसने केंद्र की राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
एक प्रेरक राजनीतिक जीवन
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1980 से कई बार लोकसभा सांसद रहे
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तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री
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केंद्र सरकार में कोयला मंत्री भी रहे
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किसानों, मज़दूरों और आदिवासियों के लिए निरंतर संघर्ष
आपको बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो शिबू सोरेन के पुत्र भी हैं, ने एक भावुक संदेश में लिखा –
“आज मैं शून्य हो गया हूँ। मेरा सब कुछ चला गया।”
उनकी यह प्रतिक्रिया न केवल एक बेटे की पीड़ा को दर्शाती है, बल्कि झारखंड के हर उस व्यक्ति की भावना को भी जो ‘गुरुजी’ को अपना नेता मानता था।




