नई दिल्ली, 17 अगस्त — बिहार में मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर मचे राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने रविवार को दावा किया कि वोट चोरी असंभव है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिना नाम लिए इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “भारत का हर नागरिक समान है, न विपक्ष न पक्ष, सब समकक्ष हैं।”
“इतनी पारदर्शी प्रक्रिया में वोट चोरी संभव नहीं।”
“राजनीति करने के लिए आयोग के कंधे पर बंदूक रखना ठीक नहीं।”
राहुल गांधी के आरोप और आयोग की प्रतिक्रिया:
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि बीजेपी और चुनाव आयोग की मिलीभगत से मतदाता सूची में गड़बड़ी कर वोट चोरी की जा रही है।
इस पर आयोग ने चुनौती दी है कि अगर किसी के पास सबूत है तो 7 दिन में शपथपत्र (हलफनामा) देकर पेश करे। ऐसा न होने पर आरोपों को निराधार माना जाएगा और झूठे आरोप लगाने वालों को देश से माफी माँगनी होगी।
आयोग की ओर से प्रमुख तथ्य:
28,370 नए मतदाता (जो 1 अक्टूबर 2025 तक 18 वर्ष के हो जाएंगे) सूची में शामिल होंगे।
दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराने के लिए अभी 15 दिन का समय शेष है।
पिछले वर्षों में 22 लाख मृत मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं।
पूरे देश में 10.5 लाख BLO मतदाता सूची पर काम कर रहे हैं।
सभी 12 प्रमुख राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि त्रुटियों की जानकारी देकर सुधार सुनिश्चित करें।
पारदर्शिता और प्रक्रिया
यह SIR प्रक्रिया 20 साल बाद हो रही है। पिछली बार 2003 में ऐसी कवायद की गई थी।
आयोग ने साफ किया कि यह NRC नहीं है, बल्कि नियमित प्रक्रिया है जो हर चुनाव से पहले की जाती है।
मतदाता Searchable electoral roll के ज़रिए अपने नाम और EPIC नंबर से सूची में चेक कर सकते हैं।
Machine-readable electoral roll (डिजिटल डेटाबेस) 2019 से प्रतिबंधित है।
जिन नागरिकों के पास स्थायी मकान नहीं है, उन्हें भी वोटर सूची में जोड़ा जाता है। पता उस स्थान का दर्ज होता है जहां वे वास्तव में रहते हैं, चाहे वह पुल, लैंपपोस्ट या अस्थायी ठिकाना ही क्यों न हो।
जब आयोग से पूछा गया कि पश्चिम बंगाल में SIR कब शुरू होगा, तो जवाब मिला—“उचित समय आने पर ही प्रक्रिया शुरू होगी।”
संवैधानिक प्रावधान
संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, वोट देने का अधिकार केवल उन भारतीय नागरिकों को है जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में सिर्फ भारतीय नागरिक ही मतदान कर सकते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में चुनाव आयोग ने दोहराया—
“यह प्रक्रिया जल्दबाज़ी में नहीं हो रही, बल्कि यह संवैधानिक ज़िम्मेदारी है।”
“भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और सबसे बड़ी मतदाता सूची इसी देश में है।”
“चुनाव आयोग मतदाताओं के साथ चट्टान की तरह खड़ा है।”
Report by Nikhil Rastogi निखिल रस्तोगी




