सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: UPHESC के दैनिक कर्मी 2002 से माने जाएंगे नियमित

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सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (UPHESC) के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 2002 से नियमित सेवा का लाभ देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि सरकार वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मियों को उनका हक नहीं छीन सकती।

👩‍⚖️ कोर्ट का टिप्पणी:
“सरकार बार-बार वित्तीय तंगी का हवाला नहीं दे सकती। यह ताबीज नहीं है जिससे वह हर बार बच निकले।”

 फैसले के मुख्य बिंदु:

  • UPHESC के दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को 2002 से नियमित माना जाए।

  • सरकार को बकाया वेतन और लाभ देने होंगे।

  • सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को खारिज किया।

  • कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता।

 इस फैसले का महत्व:

यह फैसला देशभर के उन लाखों कॉन्ट्रैक्ट और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए उम्मीद की किरण है जो वर्षों से नियमितीकरण की लड़ाई लड़ रहे हैं। अब सरकारें मनमाने तरीके से “वित्तीय तंगी” का बहाना बनाकर कर्मचारियों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगी।

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