चीन | 31 अगस्त 2025:
करीब 10 महीने के लंबे अंतराल के बाद, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आज बहुप्रतीक्षित मुलाकात तियानजिन में हुई। इस अहम बैठक को लेकर वैश्विक राजनीति, कूटनीति और व्यापार जगत की निगाहें इस समय चीन के इस प्रमुख शहर पर टिकी हुई हैं।
क्यों है यह मुलाकात खास?
यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है जब भारत और चीन के बीच कई रणनीतिक और सीमा-संबंधी मुद्दे फिर से चर्चा में हैं। पिछले वर्ष सीमा तनाव के बाद दोनों नेताओं के बीच प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई थी। अब, 10 महीने बाद यह संवाद न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का मौका है, बल्कि यह एशिया में स्थिरता और विकास के लिहाज़ से भी अहम माना जा रहा है।
एजेंडे में क्या हो सकता है?
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में निम्नलिखित मुद्दे प्रमुख रूप से चर्चा में हो सकते हैं:
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सीमा विवाद और शांति बहाली के प्रयास
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व्यापार संतुलन और आयात-निर्यात पर चर्चा
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ब्रिक्स, एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग
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क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने के उपाय
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वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी
तियानजिन क्यों बना केंद्र?
तियानजिन को इस उच्चस्तरीय बैठक के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह चीन का प्रमुख औद्योगिक और कूटनीतिक केंद्र है। शांत वातावरण और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के चलते यह शहर अक्सर अंतरराष्ट्रीय बैठकों का केंद्र बनता है।
क्या बोले विशेषज्ञ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक से दोनों देशों के संबंधों में जमी बर्फ पिघल सकती है। साथ ही यह मुलाकात एक बड़ा कूटनीतिक संकेत भी हो सकती है कि एशिया की दो बड़ी ताक़तें टकराव नहीं, संवाद का रास्ता चुन रही हैं।




