NITI Aayog रिपोर्ट: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से 8%+ विकास दर की ओर भारत, 2035 तक $1–1.4 ट्रिलियन GDP बढ़त का अनुमान

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भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए नीति आयोग (NITI Aayog) ने एक विस्तृत रोडमैप पेश किया है। हाल ही में जारी रिपोर्ट “AI for Viksit Bharat: The Opportunity for Accelerated Economic Growth” में कहा गया है कि यदि भारत आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बड़े पैमाने पर अपनाता है, तो 2035 तक देश की विकास दर 8% से अधिक हो सकती है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि एआई अकेले भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में $1–1.4 ट्रिलियन तक का योगदान कर सकता है।

रिपोर्ट का उद्देश्य यह बताना है कि एआई किस तरह भारत की आर्थिक वृद्धि को तेज कर सकता है। भारत पहले से ही डिजिटल क्रांति के दौर में है। डिजिटल इंडिया मिशन, आधार, यूपीआई और तेज़ इंटरनेट जैसी पहलों ने मजबूत तकनीकी बुनियाद तैयार की है। अब इसी आधार पर एआई का उपयोग कर “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने की योजना बनाई जा रही है।

आर्थिक अनुमान के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में 2035 तक भारत की GDP लगभग $6.6 ट्रिलियन तक पहुंच सकती है। लेकिन यदि एआई को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए तो यह आंकड़ा $8.3 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। इस तरह एआई से अकेले $1–1.4 ट्रिलियन की अतिरिक्त आर्थिक बढ़ोतरी संभव है, जो भारत को स्थायी रूप से 8%+ विकास दर पर बनाए रखेगी।

नीति आयोग ने रिपोर्ट में एआई को बढ़ावा देने के लिए तीन प्रमुख स्तंभों का उल्लेख किया है। पहला, विभिन्न क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्त और लॉजिस्टिक्स में एआई का व्यापक उपयोग। दूसरा, अनुसंधान और नवाचार के लिए सार्वजनिक और निजी निवेश को बढ़ावा देना। और तीसरा, कार्यबल को एआई आधारित नौकरियों के लिए तैयार करने हेतु बड़े पैमाने पर कौशल विकास कार्यक्रम चलाना।

रिपोर्ट में कई सिफारिशें भी दी गई हैं। इनमें शिक्षा और प्रशिक्षण में एआई को शामिल करना, उच्च गुणवत्ता वाले और सुरक्षित डेटा इकोसिस्टम का निर्माण करना, स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए एआई टूल्स को सुलभ बनाना और पारदर्शिता व नैतिकता सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढांचा तैयार करना शामिल है।

हालांकि, एआई को अपनाने की राह आसान नहीं होगी। भारत में अभी भी एआई विशेषज्ञों की कमी है, गुणवत्तापूर्ण और विविध डेटा उपलब्ध नहीं है, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच सीमित है और गोपनीयता व नैतिकता से जुड़े कई गंभीर सवाल सामने आते हैं। यदि इन चुनौतियों का समाधान नहीं किया गया, तो एआई की क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठाया जा सकेगा।

नीति आयोग के अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास यह अवसर है कि वह एआई की वैश्विक दौड़ में अग्रणी बने। यह न केवल आर्थिक लाभ देगा बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे सामाजिक क्षेत्रों में भी बड़ा परिवर्तन लाएगा। वहीं विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के पास मजबूत डिजिटल आधारभूत संरचना मौजूद है, लेकिन अब सबसे अधिक जरूरत है तेजी से कार्यान्वयन और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी की।

एआई अपनाने से भारत को कई संभावित लाभ होंगे। रोजगार के नए अवसर बनेंगे, कृषि उत्पादन में सुधार होगा, स्वास्थ्य सेवाएँ और अधिक सटीक और सुलभ होंगी, शिक्षा में व्यक्तिगत सीखने को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता व गति में सुधार आएगा।

कुल मिलाकर, नीति आयोग की यह रिपोर्ट साफ करती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत की अर्थव्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने का सबसे मजबूत साधन बन सकता है। यदि सरकार, उद्योग और समाज मिलकर एआई की क्षमता का सही उपयोग करें, तो 2035 तक भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन सकता है। “विकसित भारत 2047” का सपना अब केवल दूर का लक्ष्य नहीं, बल्कि एआई की मदद से साकार होने की दिशा में एक ठोस योजना बन गया है।

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