गाज़ा में एक बार फिर से भयावह दृश्य सामने आया है। रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के अनुसार, हमास के लड़ाकों ने तीन फलस्तीनी नागरिकों को कथित रूप से इस्राइल की मदद करने के आरोप में सार्वजनिक रूप से मौत के घाट उतार दिया। यह घटना 23 सितंबर 2025 को सामने आई और इसकी तस्वीरें व वीडियो तेजी से इंटरनेट पर फैलने लगे।
वीडियो में दिखा कि संदिग्धों को आंखों पर पट्टी बांधकर खुले स्थान पर खड़ा किया गया और फिर उन पर गोलियां चलाई गईं। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मौके पर मौजूद भीड़ नारेबाजी कर रही थी और कुछ लोग इस कदम का समर्थन करते दिखे। हमास ने इन लोगों पर इस्राइली सुरक्षा संस्थानों को संवेदनशील जानकारियां पहुंचाने का आरोप लगाया था और इसी आधार पर उन्हें बिना किसी मुकदमे या न्यायिक प्रक्रिया के कठोर सज़ा दी गई।
स्थानीय मीडिया का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी गाज़ा में संदिग्धों को सार्वजनिक रूप से दंडित करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और न्यायिक मानकों के विरुद्ध है। उन्होंने पारदर्शी जांच और कानूनी प्रक्रिया की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि ऐसे कदम नागरिकों में डर और असुरक्षा को और बढ़ाते हैं।
घटनास्थल से मिले फुटेज और रिपोर्टों के मुताबिक, फायरिंग के बाद मृतकों के शवों को वहीं छोड़ दिया गया और उनके पास चेतावनी भरे संदेश भी रखे गए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इन क्लिप्स की अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा स्वतंत्र जांच की जा रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सत्यापन के ऐसे वीडियो भावनात्मक माहौल को और भड़का सकते हैं।
इस घटना ने न केवल गाज़ा में रहने वाले लोगों के बीच खौफ़ का माहौल पैदा कर दिया है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। विभिन्न मानवाधिकार समूहों और नेताओं ने इस तरह के सार्वजनिक दंड को अमानवीय करार दिया है और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करने का आग्रह किया है। यह घटनाक्रम उस लंबे सिलसिले की एक और कड़ी है जिसमें गाज़ा में बिना मुकदमे सज़ा और सार्वजनिक दंड जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं।




