बेंगलुरु के प्रतिष्ठित ताज वेस्ट एंड होटल में आयोजित हिंदी प्रचार बैठक के दौरान कन्नड़ समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिससे कार्यक्रम में हंगामा मच गया। इस घटना में 41 कन्नड़ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कर्नाटक में हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है।
यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्रालय की राजभाषा समिति द्वारा आयोजित की गई थी, जिसमें छह सांसद भी उपस्थित थे। प्रदर्शनकारियों ने बैठक स्थल में घुसकर नारेबाजी की, पोस्टर फाड़े और फर्नीचर को नुकसान पहुँचाया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया और स्थिति को नियंत्रित किया।
कर्नाटक रक्षणा वेदिके (KRV) के अध्यक्ष डॉ. टी. ए. नारायणगोवड़ा ने इस घटना की निंदा की और कहा कि हिंदी दिवस जैसे कार्यक्रमों के आयोजन से कन्नड़ भाषियों की भावनाओं को ठेस पहुँचती है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में हिंदी का प्रचार कर्नाटक की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के लिए खतरे की घंटी है।
इस घटना ने कर्नाटक में भाषाई पहचान और हिंदी के प्रचार को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। कन्नड़ समर्थक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो वे और भी बड़े विरोध प्रदर्शन करेंगे।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस बीच, होटल प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कर्नाटक में हिंदी के प्रचार को लेकर यह पहली बार नहीं है कि विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इससे पहले भी कन्नड़ समर्थक संगठनों ने हिंदी के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ आवाज उठाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना कर्नाटक में भाषाई असहमति और पहचान के मुद्दे को और गहरा करेगी।
इस घटना के बाद, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच संवाद की आवश्यकता और बढ़ गई है ताकि दोनों पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए एक संतुलित नीति बनाई जा सके।
कर्नाटक में हिंदी के प्रचार को लेकर यह घटना एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है, जो भविष्य में राज्य की भाषा नीति और सांस्कृतिक पहचान पर प्रभाव डालेगी।




