बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा को एक बड़ा झटका लगा है। दरभंगा जिले के अलीनगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक मिश्रीलाल यादव ने शनिवार को पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया और उनकी उपेक्षा की गई। यादव ने कहा कि वे कई बार अपनी समस्याओं को लेकर पार्टी नेतृत्व के पास गए, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अब भाजपा से पूरी तरह अलग हो रहे हैं और भविष्य की राजनीति के लिए स्वतंत्र निर्णय लेंगे।
मिश्रीलाल यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी में उन्हें न तो सम्मान मिला और न ही काम करने की स्वतंत्रता। उनका आरोप है कि संगठन में कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ साजिश रची और उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की। यादव ने कहा, “मैंने पार्टी के लिए दिन-रात मेहनत की, लेकिन मुझे बदले में केवल अपमान और उपेक्षा मिली। ऐसे माहौल में रहना अब संभव नहीं।”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यादव का यह फैसला भाजपा के लिए चुनावी माहौल में नुकसानदायक साबित हो सकता है। दरभंगा और मिथिलांचल क्षेत्र में उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है। उनके इस्तीफे से न केवल भाजपा की स्थानीय इकाई को झटका लगा है, बल्कि विपक्षी दलों के लिए यह मौका बन सकता है कि वे इसे भाजपा की आंतरिक कलह के रूप में पेश करें। कांग्रेस और राजद जैसी पार्टियाँ पहले से ही भाजपा में असंतोष के मुद्दे को उछालने में लगी हैं।
गौरतलब है कि मिश्रीलाल यादव पहले भी विवादों में रह चुके हैं। वर्ष 2019 के एक पुराने मामले में स्थानीय अदालत ने जून 2025 में उन्हें दोषी करार दिया था, जिसके चलते उनकी विधानसभा सदस्यता पर भी असर पड़ा था। हालांकि, उस समय भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया था, लेकिन बाद में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियाँ बढ़ती गईं। यही कारण है कि चुनाव से पहले उनका पार्टी छोड़ना राजनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।
भाजपा की ओर से इस घटनाक्रम पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मिश्रीलाल यादव का फैसला व्यक्तिगत है और इससे पार्टी पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। वहीं, स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि यादव की लोकप्रियता और संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए उनका जाना निश्चित रूप से नुकसानदायक रहेगा।
मिश्रीलाल यादव ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे आगे किस दल में शामिल होंगे या स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरेंगे। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वे किसी अन्य क्षेत्रीय पार्टी के संपर्क में हैं, लेकिन फिलहाल उन्होंने किसी गठबंधन की पुष्टि नहीं की है। उन्होंने बस इतना कहा कि वे जनता के बीच रहकर अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करते रहेंगे।
बिहार में विधानसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ ही नेताओं के दल बदलने की रफ्तार तेज होती दिख रही है। ऐसे में मिश्रीलाल यादव का भाजपा से अलग होना आने वाले दिनों में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है। उनके इस कदम से यह संकेत भी मिलता है कि भाजपा के अंदर असंतोष की लहर बढ़ रही है, जिसे विपक्ष चुनावी मुद्दा बना सकता है।




