DRDO का बड़ा कदम: Astra Mk2 मिसाइल अब और सटीक और लंबी दूरी तक मारक

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भारत की रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने हाल ही में चीन की PL-15E मिसाइल के तकनीकी विश्लेषण के बाद अपनी स्वदेशी Astra Mk2 मिसाइल में महत्वपूर्ण सुधार करने का निर्णय लिया है। PL-15E, चीन की PL-15 का निर्यात संस्करण है, जिसे पाकिस्तान ने हाल ही में अपने J-10C लड़ाकू विमानों में शामिल किया है। यह मिसाइल सक्रिय रडार होमिंग और ड्यूल-पल्स रॉकेट मोटर जैसी उन्नत तकनीकों से लैस है, जिससे यह 145 किलोमीटर तक की दूरी पर प्रभावी ढंग से लक्ष्यों को मार सकती है।

DRDO ने PL-15E की विशेषताओं का अध्ययन करके Astra Mk2 में कई सुधार लागू करने का फैसला किया है। इसमें मिसाइल की रेंज को 160 किलोमीटर से बढ़ाकर 200 किलोमीटर से अधिक करने, प्रोपल्शन और मार्गदर्शन प्रणाली में सुधार करने और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर (ECCM) क्षमता को बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण परिवर्तन शामिल हैं। इन सुधारों से Astra Mk2 मिसाइल और अधिक सटीक, प्रभावी और दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप के प्रति प्रतिरोधी होगी।

भारतीय वायुसेना (IAF) ने Astra Mk2 मिसाइल की 700 यूनिट्स खरीदने की योजना बनाई है, जिन्हें Su-30MKI और Tejas विमानों में शामिल किया जाएगा। DRDO का लक्ष्य है कि 2026 तक यह मिसाइल पूरी तरह से परिचालन में आ जाए और 2027 तक इसका पूर्ण पैमाने पर उत्पादन शुरू हो। विशेषज्ञों का मानना है कि PL-15E के तकनीकी विश्लेषण से मिली जानकारियों के आधार पर किए गए ये सुधार Astra Mk2 को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगे। इससे न केवल भारत की वायुसेना की रणनीतिक क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि यह आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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