प्रधानमंत्री मोदी का दावा: अब नक्सलवाद इतिहास बनने जा रहा है, माओवादी इलाकों में लौटेगी दिवाली की चमक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश अब नक्सलवाद और माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इस बार देश को “माओवादी आतंक मुक्त दिवाली” की रौनक देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की सुरक्षा नीतियों, विकास योजनाओं और जन-सहभागिता के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दशकों बाद शांति और उत्सव का माहौल लौट रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह दिन अब दूर नहीं जब नक्सलवाद का नाम केवल इतिहास की किताबों में रह जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि बीते कुछ दिनों में बड़ी संख्या में माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, केवल पिछले 75 घंटों में 300 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डाल दिए हैं। इनमें कई वरिष्ठ माओवादी कमांडर भी शामिल हैं, जो लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए थे। प्रधानमंत्री ने इसे देश को नक्सलवाद से मुक्त कराने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता न केवल सुरक्षा बलों के साहस का परिणाम है बल्कि स्थानीय समुदायों के विश्वास और केंद्र व राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों का भी प्रमाण है।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में नक्सल प्रभावित इलाकों के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। सड़कों, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में सुधार से लोगों का भरोसा सरकार पर बढ़ा है। नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या जो कभी 120 से अधिक थी, अब घटकर एक अंक में आ गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परिवर्तन केवल सुरक्षा ऑपरेशनों का परिणाम नहीं बल्कि “विकास और विश्वास” की नीति की जीत है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर और आस-पास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबरें सामने आई हैं। अबूझमाड़ और सुकमा जैसे इलाकों में वर्षों से सक्रिय माओवादी संगठनों के सदस्यों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अब नक्सलियों की शक्ति काफी हद तक कमजोर हो चुकी है और सरकार की रणनीति उन्हें आर्थिक और वैचारिक रूप से अलग-थलग करने में सफल रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस बार दिवाली पर देश के वे इलाके भी रोशनी से जगमगाएंगे, जहां कभी गोलियों और बमों की आवाज गूंजती थी। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में वर्षों तक हिंसा के डर से लोग त्यौहार नहीं मना पाते थे, वहां अब शांति का दीपक जलने वाला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल हिंसा को खत्म करना नहीं, बल्कि उन इलाकों को विकास, शिक्षा और अवसरों से जोड़ना है ताकि शांति स्थायी रूप से कायम रह सके।

विपक्षी दलों और विशेषज्ञों ने हालांकि यह कहा है कि आत्मसमर्पण के बाद भी सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुनर्वास और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया प्रभावी हो। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुरक्षा उपायों से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों से ही स्थायी शांति संभव होगी। मानवाधिकार समूहों ने भी यह सुझाव दिया है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को समाज में सम्मानजनक पुनर्वास के अवसर दिए जाएं ताकि वे दोबारा हथियार न उठाएं।

प्रधानमंत्री मोदी ने समापन में कहा कि आने वाले वर्षों में भारत पूरी तरह से नक्सलवाद मुक्त होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब तक देश का हर इलाका विकास की मुख्यधारा में नहीं जुड़ता, तब तक सरकार का मिशन अधूरा रहेगा। इस बार की दिवाली केवल रोशनी का पर्व नहीं होगी, बल्कि शांति और विश्वास की जीत का प्रतीक बनेगी।

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