गाजा संघर्ष पर फिर संकट: अमेरिकी सीज़फायर शर्तों को तोड़ने को तैयार इस्राइल, ट्रंप बोले— “हम समझौता बनाए रखेंगे”

SHARE:

गाजा पट्टी में शांति बहाल करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता से लागू किया गया युद्धविराम एक बार फिर संकट में पड़ गया है। मंगलवार को इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा में “प्रभावी प्रतिकार” की अनुमति देते हुए सीमित सैन्य कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद इस्राइली सेनाओं ने कई स्थानों पर हवाई और जमीनी हमले किए, जिससे गाजा में नागरिक हताहतों की खबरें आईं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब अमेरिका द्वारा प्रायोजित युद्धविराम समझौता अब भी प्रभाव में है और उसे तोड़ने पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना की आशंका है।

दरअसल, यह सीज़फायर समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर हुआ था। ट्रंप प्रशासन ने 20 बिंदुओं वाला रोडमैप तैयार किया था, जिसमें बंधकों की रिहाई, मानवीय सहायता की बहाली और इस्राइली सेनाओं की चरणबद्ध वापसी शामिल थी। 10 अक्टूबर से लागू हुए इस समझौते को शुरू में एक बड़ी उपलब्धि माना गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी बनी रही। समझौते के बावजूद सीमा पर झड़पें और आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे, जिससे यह सीज़फायर लगातार अस्थिर स्थिति में पहुंच गया।

तनाव तब और बढ़ गया जब हमास ने इस्राइल पर समझौते की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एक बंधक के शव को सौंपने की प्रक्रिया रोक दी। हमास ने दावा किया कि इस्राइली हमले सीज़फायर की भावना के विपरीत हैं, जबकि इस्राइल ने पलटवार करते हुए कहा कि हमास पहले से युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है। दोनों ओर से इस तरह के आरोपों के बीच सीमित गोलीबारी और हवाई हमले हुए, जिससे क्षेत्र में फिर से भय और अस्थिरता का माहौल बन गया।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीज़फायर बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “कुछ भी इस समझौते को खतरे में नहीं डाल सकता” और अमेरिका इसे कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर इस्राइली सैनिकों पर हमला होता है तो इज़राइल को जवाब देने का अधिकार है। उनके इस बयान को विशेषज्ञों ने “सशर्त समर्थन” के रूप में देखा, जो एक तरफ शांति के पक्ष में है, तो दूसरी तरफ इस्राइल को सीमित सैन्य कार्रवाई की खुली छूट देता है।

वर्तमान में गाजा में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। हजारों लोग विस्थापित हैं, राहत सामग्री और दवाइयों की भारी कमी है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि युद्धविराम पूरी तरह लागू नहीं रहा, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। वहीं, कतर, मिस्र और तुर्किये जैसे देशों की मध्यस्थता इस समझौते को टिकाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।

कुल मिलाकर, गाजा में लागू यह युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है। इज़राइल की सुरक्षा चिंताएं और हमास के व्यवहार ने इस समझौते को अस्थिर बना दिया है। आने वाले दिनों में अमेरिका और क्षेत्रीय शक्तियों की सक्रियता ही तय करेगी कि यह युद्धविराम शांति की दिशा में कदम बनेगा या फिर संघर्ष एक बार फिर व्यापक रूप ले लेगा।

Leave a Comment