जेद्दा, 29 अक्टूबर 2025 — इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर बयान जारी करते हुए वहां के लोगों के साथ अपनी “पूर्ण एकजुटता” जताई और उनके स्व-निर्णय के अधिकार का समर्थन दोहराया है। ओआईसी महासचिवालय की ओर से जारी इस बयान में कहा गया कि संगठन क्षेत्र में शांति, स्थिरता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस दिशा में ठोस प्रयास करने चाहिए। ओआईसी ने जम्मू-कश्मीर के मसले को संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप हल करने की बात भी कही, ताकि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।
हालांकि, ओआईसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर (PoK) में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हाल ही में PoK के कई इलाकों—मुजफ्फराबाद, रावलकोट, कोटली और मीरपुर—में स्थानीय लोगों ने महंगाई, बिजली संकट और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुईं, जिनमें कुछ लोगों के घायल होने की खबरें आईं। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पाकिस्तान सरकार ने उनके क्षेत्र के विकास को लगातार नजरअंदाज किया है और संसाधनों का दोहन कर उन्हें उनके ही अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
भारत सरकार ने PoK में हो रहे प्रदर्शनों और वहां की बिगड़ती स्थिति पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में फैलता असंतोष वहां की नीतियों की विफलता को दर्शाता है। भारत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाकर दुनिया का ध्यान भटकाना चाहता है, जबकि अपने ही प्रशासनिक क्षेत्र में मानवाधिकारों की भारी उल्लंघनाओं पर चुप्पी साधे हुए है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विश्लेषकों ने भी ओआईसी के इस रुख पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि संगठन वास्तव में मानवाधिकारों और मुस्लिम समुदायों की भलाई के लिए चिंतित है, तो उसे PoK में हो रहे प्रदर्शनों और वहां की हिंसा पर भी समान रूप से प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। ओआईसी की यह “चयनात्मक सक्रियता” एक बार फिर उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। आलोचकों का मानना है कि संगठन की नीतियाँ राजनीतिक और रणनीतिक हितों से प्रभावित हैं, जिसके चलते वह कई बार संवेदनशील मुद्दों पर निष्पक्ष रुख नहीं अपना पाता।
इस तरह ओआईसी का यह ताजा बयान एक बार फिर दक्षिण एशिया की कूटनीतिक राजनीति को सुर्खियों में ले आया है। जम्मू-कश्मीर पर लगातार बयान जारी करने के बावजूद संगठन पाकिस्तान-प्रशासित क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं पर मौन है। इससे यह प्रश्न उठता है कि क्या ओआईसी वास्तव में सभी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में समान रूप से न्याय और मानवाधिकारों की पैरवी कर रहा है, या फिर उसका ध्यान केवल राजनीतिक संदेश देने तक सीमित है।




