बिहार चुनाव 2025: पीएम मोदी का हमला — “निल बट्टे सन्नाटा, RJD के 15 सालों में शून्य विकास”

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और महागठबंधन पर तीखा हमला बोला। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधनों में कहा कि जब राज्य में RJD का शासन था, तब बिहार में विकास की रफ्तार पूरी तरह ठप पड़ गई थी। उन्होंने कहा कि “RJD के 15 साल के जंगलराज में विकास का हाल ‘निल बट्टे सन्नाटा’ जैसा था। उस दौर में न सड़कें बनीं, न उद्योग लगे और न ही युवाओं को रोजगार मिला।” पीएम मोदी ने कहा कि उस शासनकाल में भ्रष्टाचार, अपराध और जातिगत राजनीति ने बिहार की छवि को नुकसान पहुंचाया और लोग भय के माहौल में जीने को मजबूर थे।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज का बिहार उस अंधेरे दौर से निकल चुका है और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि एनडीए सरकार के तहत राज्य में सड़कों, एक्सप्रेसवे, रेल नेटवर्क और उद्योगों के विस्तार पर तेज़ी से काम हो रहा है। मोदी ने यह भी कहा कि पिछली सरकारों के समय बिहार में न कोई बड़ा शिक्षण संस्थान बना और न ही कोई ऐसी योजना शुरू हुई जो राज्य के युवाओं के भविष्य को दिशा दे सके। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार बिहार को ‘विकसित भारत’ की दिशा में अग्रणी राज्य बनाने के लिए काम कर रही है।

पीएम मोदी ने रैलियों में यह भी कहा कि एनडीए सरकार के अगले कार्यकाल में बिहार में औद्योगिक निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर खास ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे “विकास के नाम पर वोट” करें और “जंगलराज” के दौर में लौटने की गलती न दोहराएं। मोदी ने यह भी दावा किया कि आज बिहार में हर क्षेत्र — चाहे बिजली, सड़क, स्वास्थ्य या शिक्षा हो — पहले से कहीं बेहतर स्थिति में है और यह सब एनडीए की नीतियों की वजह से संभव हुआ है।

वहीं, प्रधानमंत्री के इन बयानों पर आरजेडी और महागठबंधन के नेताओं ने कड़ा पलटवार किया। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री चुनावी मंचों से झूठ बोल रहे हैं और जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में बेरोजगारी, महंगाई और अपराध में इजाफा हुआ है, जबकि केंद्र सरकार सिर्फ पुराने मुद्दों को दोहराकर जनता को गुमराह कर रही है। तेजस्वी ने कहा कि बिहार में असली मुद्दा रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य का है और जनता अब “विकास के खोखले वादों” से ऊब चुकी है।

बिहार का चुनावी माहौल इस बार पूरी तरह विकास बनाम जंगलराज के नैरेटिव पर केंद्रित होता दिख रहा है। प्रधानमंत्री जहां पुराने दौर को याद दिलाकर वोटरों को चेतावनी दे रहे हैं, वहीं विपक्ष मौजूदा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए बदलाव की अपील कर रहा है। दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है, लेकिन यह तय है कि 2025 का यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों का संघर्ष नहीं बल्कि बिहार की विकास दिशा तय करने वाला निर्णायक चुनाव साबित हो सकता है।

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