नई दिल्ली: भारत में फलस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने एक विशेष बातचीत में कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए, क्योंकि भारत की मौजूदगी न केवल वैश्विक शांति के लिए आवश्यक है, बल्कि यह फलस्तीनी जनता की सुरक्षा और मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए भी निर्णायक साबित हो सकती है। राजदूत ने कहा कि भारत हमेशा से शांति, समानता और न्याय की वकालत करता रहा है, और ऐसी परिस्थिति में जब दुनिया कई मोर्चों पर संघर्ष झेल रही है, भारत जैसे देश की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास इस बात का साक्षी है कि उसने हमेशा मानवीय मूल्यों और वैश्विक संतुलन को प्राथमिकता दी है। फलस्तीनी राजदूत के अनुसार, अगर भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलती है, तो वह वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में संतुलित और निष्पक्ष दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगा, जो न केवल फलस्तीन बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी होगा। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक ताकत इसे उस स्तर पर ले आई है जहां उसकी आवाज़ संयुक्त राष्ट्र के उच्च मंचों पर निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने गाजा और पश्चिमी तट की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में शांति और पुनर्निर्माण के लिए भारत की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत न केवल मानवीय सहायता के माध्यम से बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। राजदूत ने कहा, “भारत एक ऐसा देश है जो विकास, संवाद और शांति की भाषा समझता है। अगर भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य बनता है, तो यह न केवल हमारी सुरक्षा बल्कि पूरी दुनिया के हित में होगा।”
राजदूत ने आगे कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा से स्वतंत्र और संतुलित रही है, और यही कारण है कि मध्य पूर्व के देश भारत पर भरोसा करते हैं। उन्होंने भारत से अपील की कि वह फलस्तीन की शांति पहल और गाजा पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाए। राजदूत ने कहा कि भारत की उपस्थिति वैश्विक निर्णय प्रक्रिया को अधिक न्यायसंगत और बहु-ध्रुवीय बनाएगी।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि भारत की स्थायी सदस्यता से वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को अधिक बल मिलेगा और इससे संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया में विविधता और संतुलन आएगा। फलस्तीनी राजदूत की यह मांग ऐसे समय आई है जब दुनिया संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता पर खुलकर चर्चा कर रही है और भारत स्वयं लंबे समय से अपनी सदस्यता की मांग उठा रहा है।




