भारतीय नौसेना अपनी समुद्री क्षमताओं को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 24 नवंबर को अत्याधुनिक पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत INS Mahe को आधिकारिक रूप से अपनी सेवा में शामिल करने जा रही है। यह युद्धपोत ASW-SWC (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) परियोजना का पहला जहाज़ है, जिसे विशेष रूप से तटीय इलाकों और उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। INS Mahe को कोच्चि स्थित कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने तैयार किया है, और इसका निर्माण भारतीय नौसेना की स्वदेशी क्षमता तथा ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की बढ़ती सफलता को उजागर करता है। इस परियोजना में देशी उद्योगों की भागीदारी उल्लेखनीय रही, जिससे घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिला है।
INS Mahe को आधुनिक तकनीक से लैस करते हुए इसका डिजाइन ऐसा बनाया गया है कि यह उथले समुद्री क्षेत्रों में भी उच्च दक्षता के साथ संचालित हो सके। लगभग 78 मीटर लंबे और लगभग 1,000–1,100 टन वजनी इस जहाज़ में अत्याधुनिक सॉनर सिस्टम, एंटी-सबमरीन रॉकेट्स, टॉर्पेडो लॉन्चिंग क्षमता और उन्नत रडार तकनीक शामिल की गई है। इसका पानी में कम शोर उत्पन्न करने वाला वॉटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम इसे पनडुब्बियों का पता लगाने और उन पर सटीक कार्रवाई करने में और प्रभावी बनाता है। जहाज़ की बेहतर maneuverability इसे तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी, खोज और बचाव अभियानों तथा कम तीव्रता वाले नौसैनिक आपरेशनों के लिए अत्यंत उपयोगी बनाती है।
INS Mahe की ऑपरेशनल भूमिका भारतीय नौसेना के तटीय रक्षा ढांचे को मजबूत बनाना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पनडुब्बी गतिविधियों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए यह जहाज़ नौसेना की एंटी-सबमरीन क्षमताओं को कई गुना बढ़ाएगा। इसे पुराने Abhay-क्लास कॉर्वेट्स की जगह तैनात किया जाएगा, जो काफी समय से सेवा में हैं। Mahe में लगभग 57 सदस्यों का क्रू दल तैनात रहेगा, जिसमें अधिकारी और नाविक दोनों शामिल हैं। जहाज़ को DNV मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा मानकों का पालन करता है।
INS Mahe आठ ASW-SWC जहाज़ों की श्रृंखला में पहला जहाज़ है। आने वाले समय में इस परियोजना के अन्य पोत भी चरणबद्ध तरीके से नौसेना को सौंपे जाएंगे। इन पोतों का निर्माण न केवल नौसैनिक शक्ति को बढ़ावा देगा, बल्कि घरेलू शिपयार्ड और रक्षा उद्योग के लिए रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर भी पैदा करेगा। 24 नवंबर को INS Mahe का नौसेना में शामिल होना भारतीय समुद्री सुरक्षा तैयारियों को नया आयाम देगा और तटीय इलाकों की निगरानी तथा रक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।




