बिहार की राजनीति में नए सत्ता-संतुलन की दिशा बुधवार को और स्पष्ट हो गई, जब जदयू और भाजपा दोनों ने अपने-अपने विधायक दल के नेताओं का चयन कर दिया। जदयू ने सर्वसम्मति के साथ नीतीश कुमार को एक बार फिर विधायक दल का नेता चुना, जिससे यह संकेत मिल गया कि वे आगामी एनडीए सरकार का नेतृत्व करने जा रहे हैं। पार्टी कार्यालय में आयोजित बैठक में सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने नीतीश पर भरोसा जताते हुए कहा कि राज्य की स्थिरता और प्रशासनिक निरंतरता के लिए उनका नेतृत्व सबसे मजबूत विकल्प है। इस चयन के बाद जदयू खेमे में उत्साह का माहौल देखा गया क्योंकि यह कदम सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पद के औपचारिक ऐलान की तैयारी माना जा रहा है।
उधर भाजपा विधायक दल की बैठक में भी अहम फैसले लिए गए। पार्टी ने सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुना, जबकि विजय कुमार सिन्हा को उपनेता की जिम्मेदारी सौंपी गई। दोनों नेता पिछली सरकार में उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और हालिया चुनाव में क्रमशः तारापुर व लखीसराय सीट से विजयी हुए हैं। भाजपा के इन निर्णयों को राजनीतिक विश्लेषक इस रूप में देख रहे हैं कि पार्टी ने राज्य में अपना पुराना नेतृत्व ढांचा बरकरार रखते हुए नई सरकार में मजबूत भूमिका निभाने के संकेत दे दिए हैं। चर्चाओं के अनुसार केंद्र और राज्य के वरिष्ठ नेतृत्व के बीच पिछले कुछ दिनों से लगातार समीकरण साधने का सिलसिला चल रहा था, जिसके बाद यह अंतिम रूप दिया गया।
नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल के नेता बनाए जाने के बाद एनडीए में मुख्यमंत्री पद के मसले पर लगभग सहमति बन चुकी है। इसी क्रम में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियाँ भी तेज़ हो गई हैं। माना जा रहा है कि 20 नवंबर को गांधी मैदान में शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे। प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारी शुरू हो गई है ताकि नए मंत्रिमंडल के गठन के तुरंत बाद विभागों का कार्य-वितरण सहज रूप से किया जा सके। सूत्रों के अनुसार दो उपमुख्यमंत्रियों के साथ 20 से अधिक मंत्रियों वाला संतुलित मंत्रिमंडल बनाए जाने की संभावना है, जिसमें जदयू, भाजपा और अन्य सहयोगी दलों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
इन सभी घटनाक्रमों ने राज्य की राजनीति को एक निर्णायक मोड़ दे दिया है। चुनावी नतीजों के बाद जिस तरह से जदयू और भाजपा के बीच तालमेल बैठा है, उससे साफ़ है कि दोनों दल सत्ता-साझेदारी के नए अध्याय की ओर बढ़ चुके हैं। नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा की तिकड़ी एक बार फिर बिहार की शासन व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए तैयार मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें शपथ ग्रहण और मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हैं, जिसके बाद राज्य की नई राजनीतिक संरचना और नीति दिशा पूर्ण रूप से सामने आ जाएगी।




