भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक कार्यक्रम के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत और उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को प्रमुखता से उठाया। नड्डा ने आरोप लगाया कि आज़ादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस ने जानबूझकर पटेल के योगदान को दबाया और उन्हें वह स्थान नहीं दिया, जिसके वे वास्तव में हकदार थे। उन्होंने कहा कि रियासतों के एकीकरण से लेकर मजबूत राष्ट्रीय ढांचे की नींव रखने तक, पटेल की निर्णायक भूमिका को इतिहास में वह प्रमुखता नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। नड्डा के अनुसार, इस उपेक्षा को दूर करने और सरदार पटेल को उचित सम्मान दिलाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को जाता है, जिसने उनकी याद में बड़े स्तर पर स्मारक, यात्राएँ और राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किए।
कार्यक्रम में नड्डा ने ‘@150 यूनिटी मार्च’ का शुभारंभ भी किया, जिसे उन्होंने राष्ट्रीय एकता की भावना को जन-जन तक पहुँचाने का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में पूरे देश में भाजपा द्वारा लगातार विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं, ताकि युवा पीढ़ी को देश की एकता और अखंडता के लिए पटेल के योगदान का महत्व समझाया जा सके। नड्डा का यह वक्तव्य न केवल ऐतिहासिक संदर्भों में कांग्रेस पर एक राजनीतिक टिप्पणी था, बल्कि भाजपा द्वारा पटेल की विरासत को पुनर्स्थापित करने के अपने दावे को भी मजबूत करने का प्रयास था।
विपक्ष की ओर से यह तर्क रखा जाता रहा है कि इतिहास का राजनीतिक उपयोग राष्ट्र के समग्र दृष्टिकोण के साथ न्याय नहीं करता और किसी भी महान नेता की स्मृति को राजनीतिक सीमाओं में नहीं बाँधा जाना चाहिए। इसके बावजूद, सरदार पटेल की विरासत से जुड़ी यह बहस लगातार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनी हुई है। नड्डा के बयान के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में है कि स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और राष्ट्रनिर्माताओं की भूमिका को इतिहास में कैसे दर्ज किया गया और आज उसकी व्याख्या कैसे की जा रही है। भाजपा का कहना है कि देश को पटेल की दूरदर्शिता और योगदान के बारे में सही जानकारी देना उसकी नैतिक ज़िम्मेदारी है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक महत्वाकांक्षा के तौर पर देखता है। इस सबके बीच, सरदार पटेल की जयंती पर देशभर में आयोजित कार्यक्रम उनकी स्मृति को फिर से राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला रहे हैं।




