रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 और 5 दिसंबर, 2025 को भारत का दौरा करने वाले हैं। यह दौरा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है और इसे दोनों देशों के बीच “विशेष और परम रणनीतिक भागीदारी” को और मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है। पुतिन का यह दौरा पिछले कुछ सालों में भारत-रूस संबंधों में आए महत्वपूर्ण विकासों के बीच हो रहा है और इसे द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
दौरे के दौरान रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेष रूप से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति और अन्य रक्षा सौदों पर बातचीत को अहम माना जा रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच आर्थिक और ऊर्जा सहयोग भी बातचीत के एजेंडे में शामिल होगा। यह दौरा इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक राजनीति और सुरक्षा समीकरण बदल गए हैं, और भारत-रूस संबंधों की स्थिरता और मजबूती की दुनिया को यह पुष्टि देगा।
इतिहास और भू-राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं। दोनों देश BRICS, Shanghai Cooperation Organisation (SCO) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अक्सर एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं। इस दौरे के दौरान यह देखा जाएगा कि भारत-रूस साझेदारी किस तरह से रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय मामलों में नई गहराई हासिल करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस दौरे से न केवल मौजूदा रक्षा और व्यापार समझौते मज़बूत होंगे, बल्कि भविष्य में नई साझेदारियों के लिए रास्ते भी खुले होंगे।
हालांकि, इस दौरे की संवेदनशीलता भी कम नहीं है। पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया, अंतरराष्ट्रीय दबाव, और वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारत को संतुलित विदेश नीति अपनानी होगी। आम जनता और मीडिया की निगाह इस बात पर भी रहेगी कि इस दौरे से भारत को किस प्रकार के लाभ प्राप्त होंगे, चाहे वह रक्षा में आधुनिकता हो, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग हो या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा में वृद्धि।
कुल मिलाकर, 4-5 दिसंबर का यह दौरा केवल औपचारिक बैठक नहीं बल्कि भारत-रूस के बीच रक्षा, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस दौरे के नतीजे आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनके सहयोग को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।




