उडुपी में मोदी का संबोधन: गीता-ज्ञान को बताया जीवन और शासन दोनों की प्रेरणा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के उडुपी में स्थित प्रसिद्ध श्री कृष्ण मठ में आयोजित ‘लक्ष कंठ गीता पारायण’ कार्यक्रम में भाग लिया, जहां देशभर से आए श्रद्धालुओं और वैदिक विद्वानों ने एक साथ भगवद-गीता के श्लोकों का पाठ किया। कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने इसे एक भव्य आध्यात्मिक आयोजन का रूप दिया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि भगवद-गीता केवल एक आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन और कर्तव्य का मार्गदर्शन करने वाला ज्ञान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गीता हमें यह भी सिखाती है कि अत्याचारियों का अंत तथा अधर्म का विनाश समाज और राष्ट्र की शांति के लिए आवश्यक है। मोदी ने बताया कि श्री कृष्ण और राम के आदर्शों ने भारत के सांस्कृतिक और नैतिक ढांचे को दिशा दी है, और आज भी नीतियों व शासन की प्रेरणा इन्हीं सिद्धांतों से मिलती है।

अपने संबोधन से पहले प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर में बने नए सुवर्ण तीर्थ मंडप का उद्घाटन किया तथा कनक-किंडी के लिए तैयार किए गए सुनहरे आवरण का समर्पण किया। इस अवसर को उन्होंने उडुपी की ऐतिहासिक आध्यात्मिक परंपराओं को सम्मान देने वाला क्षण बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उडुपी के मठों ने सदियों से सामाजिक-धार्मिक आंदोलनों को दिशा दी है और देश की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध बनाया है। उन्होंने उपस्थित लोगों से सेवा-भाव, कर्तव्यपालन और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर आगे आने की अपील भी की।

कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा की व्यापक व्यवस्थाएँ की गई थीं। प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सख्त प्रबंध किए, जबकि यातायात नियंत्रण, प्रवेश व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। गीता-पाठ के बाद प्रधानमंत्री ने स्थानीय साधु-संतों और गणमान्य लोगों से भी भेंट की, जिसमें क्षेत्रीय विकास और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सामूहिक गीता-पाठ जैसे आयोजन देश की आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं तथा लोगों को राष्ट्रनिर्माण के संकल्प के प्रति प्रेरित करते हैं।

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