संसद के शीतकालीन सत्र 2025 की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि संसद “ड्रामा” करने का मंच नहीं है, बल्कि यह देशहित में काम करने और परिणाम देने का स्थान होना चाहिए। पीएम मोदी ने विपक्ष से आग्रह किया कि वे चुनावों में हुई हार और निराशा से बाहर आएं और संसद को नारेबाज़ी या राजनीतिक theatrics के लिए इस्तेमाल न करें, बल्कि रचनात्मक सुझाव और नीति निर्माण पर ध्यान दें। उन्होंने यह भी जोर दिया कि नई पीढ़ी को मौके दिए जाने चाहिए, ताकि संसद में नई ऊर्जा और नए विचार आएं।
इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है, जिनमें प्रमुख रूप से परमाणु ऊर्जा (न्यूक्लियर एनर्जी) से संबंधित बिल शामिल हैं। वहीं, विपक्ष ने SIR (मतदाता सूची सुधार/शुद्धिकरण) प्रक्रिया और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान अवैध वोटर्स को हटाने की कोशिश हो रही है, जो लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में पीएम मोदी का “ड्रामा नहीं, डिलीवरी” वाला बयान इस बात का संकेत है कि सरकार संसद को विकास और नीति निर्माण का मंच बनाना चाहती है, न कि राजनीतिक टकराव का।
राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इस सत्र में विपक्ष पूरी ताकत से सवाल उठाएगा और बहस का माहौल गरम रहेगा। इसके बावजूद, सरकार का प्रयास है कि सत्र रचनात्मक और विकास-उन्मुख रहे। पीएम मोदी का यह संदेश केवल एक बयान नहीं है, बल्कि सरकार की रणनीति को भी दर्शाता है कि संसद में काम और डिलीवरी को प्राथमिकता दी जाए। शीतकालीन सत्र में जैसे-जैसे विधेयक पेश होंगे और विपक्ष अपनी मांगों के साथ सामने आएगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संसद में “डिलीवरी” की नीति सफल होती है या फिर सियासत और “ड्रामा” फिर से माहौल में लौट आते हैं।




