कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) का नाम बदलने के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी किसी एक परिवार या राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि वे पूरे देश की साझा विरासत हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने भावुक टिप्पणी की—“महात्मा गांधी मेरे परिवार से नहीं हैं, लेकिन वे इस देश के हैं।” प्रियंका ने कहा कि किसी योजना से गांधी जी का नाम हटाना उनके विचारों और योगदान को कमतर करने की कोशिश जैसा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि सरकार को योजनाओं के नाम बदलने के बजाय उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि मनरेगा देश की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है, जिसने करोड़ों गरीब और ग्रामीण परिवारों को रोजगार का कानूनी अधिकार दिया है। नाम बदलने से न तो ग्रामीणों की समस्याएं हल होंगी और न ही बेरोजगारी का समाधान निकलेगा। असली सवाल यह है कि लोगों को समय पर काम और पूरी मजदूरी मिल रही है या नहीं।
उन्होंने प्रस्तावित नए कानून और ढांचे पर भी सवाल उठाए और आशंका जताई कि इससे मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों के रोजगार के अधिकार को कमजोर किया जा सकता है। प्रियंका ने कहा कि यदि किसी भी बदलाव से गरीबों के अधिकारों में कटौती होती है, तो कांग्रेस उसका कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या नाम बदलने और नई ब्रांडिंग पर खर्च होने वाला पैसा सीधे तौर पर मजदूरों के हित में लगाया जा रहा है।
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार पर इतिहास और महापुरुषों की विरासत को मिटाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि यह केवल एक नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, ग्रामीण रोजगार और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो संसद के साथ-साथ जनता के बीच भी इसका विरोध किया जाएगा।
सरकार की ओर से अब तक इस नाम परिवर्तन और संभावित संशोधनों को लेकर विस्तृत और स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में मनरेगा के भविष्य और उसके स्वरूप को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद में और तीखी चर्चा होने की संभावना है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।




