उत्तर प्रदेश में लेखपाल भर्ती परीक्षा 2025 को लेकर आरक्षण विसंगतियों ने राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल गर्म कर दिया है। राज्य में कुल 7,994 पदों पर भर्ती के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने 16 दिसंबर 2025 को नोटिफिकेशन जारी किया। इसके बाद भर्ती विज्ञापन में श्रेणीवार आरक्षण के आंकड़ों में कथित विसंगति सामने आई। सामान्य वर्ग (UR) के लिए पद अपेक्षा से अधिक दिखाए गए, जबकि ओबीसी वर्ग को संविधान में तय 27% के बजाय कम पद दिए गए। इसके अलावा EWS, SC और ST वर्ग के लिए आरक्षण को लेकर भी बहस हुई।
इस मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया और राजस्व परिषद को चेतावनी दी। उन्होंने निर्देश दिए कि भर्ती में आरक्षण नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योगी सरकार ने स्पष्ट किया कि अगर किसी स्तर पर विसंगति पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद राजस्व परिषद ने श्रेणीवार आंकड़ों की पुन: समीक्षा शुरू कर दी है और संशोधित दस्तावेज एक सप्ताह के भीतर UPSSSC को भेजने की तैयारी कर रही है।
वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा और राज्य सरकार पर आरक्षण नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग के लिए केवल 1,441 पद आरक्षित किए गए, जबकि 27% के हिसाब से लगभग 2,158 पद आरक्षित होने चाहिए थे। अखिलेश यादव ने इसे OBC वर्ग के अधिकारों की हकमारी बताया और भाजपा पर संविधान के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
इस विवाद ने न केवल भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इसे राजनीतिक बहस का केंद्र भी बना दिया है। राजस्व परिषद की सचिव ने कहा कि सभी डेटा की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा की जा रही है और संशोधित दस्तावेज जल्द ही आयोग को भेजा जाएगा, ताकि भर्ती प्रक्रिया स्पष्ट, विवाद-मुक्त और नियमों के अनुसार आगे बढ़ सके। इस प्रकार, लेखपाल भर्ती परीक्षा में आरक्षण को लेकर उठे विवाद ने सरकार के शीर्ष नेतृत्व को हस्तक्षेप करने पर मजबूर किया और प्रशासन को भर्ती प्रक्रिया को नियमों के अनुसार संचालित करने की दिशा में कदम बढ़ाने पर विवश किया है।




