प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय और दूरदर्शी कूटनीति के चलते भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के बीच संबंधों में बीते वर्षों में अभूतपूर्व मजबूती देखने को मिली है। रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और प्रवासी भारतीयों के कल्याण जैसे मुद्दों पर भारत की बढ़ती भूमिका को स्वीकार करते हुए खाड़ी देशों ने पीएम मोदी को अपने-अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया है। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि माने जा रहे हैं, बल्कि भारत–खाड़ी संबंधों की नई ऊंचाइयों का प्रतीक भी हैं।
खाड़ी क्षेत्र में भारत की बढ़ती कूटनीतिक पकड़ का सबसे बड़ा आधार आपसी विश्वास और व्यावहारिक सहयोग रहा है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और ओमान जैसे GCC सदस्य देशों ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा। इन सम्मानों के पीछे भारत की संतुलित विदेश नीति, आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख, क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग और आर्थिक भागीदारी को प्रमुख कारण माना जाता है। भारत आज खाड़ी देशों के लिए एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा है।
ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और GCC देशों का सहयोग बेहद अहम है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है, वहीं भारत का विशाल बाजार और बढ़ती अर्थव्यवस्था GCC के लिए निवेश के नए अवसर खोलती है। बीते वर्षों में रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा और हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा मिली है। इसके साथ ही रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी मजबूत हुआ है, जिसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा और खुफिया साझेदारी शामिल हैं।
प्रवासी भारतीय भी भारत–खाड़ी संबंधों की एक मजबूत कड़ी हैं। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार और पेशेवर कार्यरत हैं, जिनकी सुरक्षा और कल्याण को लेकर पीएम मोदी ने लगातार संवाद और समझौतों पर जोर दिया। इसका सकारात्मक असर यह रहा कि कई देशों में श्रम सुधार, सामाजिक सुरक्षा और सामुदायिक सहयोग के नए रास्ते खुले। खाड़ी नेतृत्व ने भारत की इस जिम्मेदार और संवेदनशील भूमिका की सराहना की है।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी को GCC देशों से मिले सर्वोच्च सम्मान भारत की वैश्विक साख में वृद्धि और खाड़ी क्षेत्र में भारत की बढ़ती अहमियत को दर्शाते हैं। यह कूटनीतिक सफलता आने वाले समय में व्यापार, निवेश, तकनीक और सुरक्षा सहयोग को और गहराई देने का आधार बनेगी। भारत और खाड़ी देशों के रिश्ते अब पारंपरिक ऊर्जा साझेदारी से आगे बढ़कर व्यापक रणनीतिक सहयोग की ओर अग्रसर होते नजर आ रहे हैं।




