गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर इस बार देश की सैन्य शक्ति का एक अलग और प्रेरणादायी रूप देखने को मिलेगा। परंपरागत परेड के साथ-साथ भारतीय सेना के ‘मूक योद्धा’ यानी ऊंट, घोड़े और सैन्य श्वान भी कदमताल करते नजर आएंगे। ये वे जीव हैं, जो बिना बोले सीमाओं की रक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों, खोज-बचाव कार्यों और दुर्गम इलाकों में सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर डटे रहते हैं।
कर्तव्य पथ पर परेड के दौरान दर्शकों को सेना की विभिन्न टुकड़ियों के साथ इन विशेष प्रशिक्षित पशुओं की क्षमताओं की झलक देखने को मिलेगी। सीमा सुरक्षा बल (BSF) और भारतीय सेना के ऊंट दस्ता रेगिस्तानी क्षेत्रों में अपनी उपयोगिता और अनुशासन का प्रदर्शन करेगा। राजपूताना परंपरा से जुड़े ये ऊंट दस्ता वर्षों से पश्चिमी सीमा पर निगरानी और गश्त में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
वहीं, सेना और अर्धसैनिक बलों के घोड़े परेड में शान और अनुशासन का प्रतीक बनेंगे। घुड़सवार टुकड़ियां कठिन इलाकों में त्वरित संदेशवाहक, गश्त और विशेष अभियानों में आज भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। परेड के दौरान इन घोड़ों की सटीक चाल, संतुलन और प्रशिक्षण दर्शकों को आकर्षित करेगा।
गणतंत्र दिवस 2026 की परेड का एक और बड़ा आकर्षण होंगे सैन्य श्वान (War Dogs)। अत्याधुनिक प्रशिक्षण से लैस ये श्वान विस्फोटक खोज, आतंकियों की पहचान, भीड़ नियंत्रण और आपदा के समय राहत-बचाव कार्यों में अहम भूमिका निभाते हैं। परेड में इन श्वानों की फुर्ती, आज्ञाकारिता और साहस देशवासियों को सेना के इस अनदेखे पक्ष से रू-बरू कराएगी।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, ‘मूक योद्धाओं’ की भागीदारी का उद्देश्य न केवल सैन्य परंपराओं को सामने लाना है, बल्कि यह संदेश देना भी है कि देश की सुरक्षा में इंसानों के साथ-साथ ये जीव भी बराबर के भागीदार हैं। गणतंत्र दिवस 2026 की परेड इस लिहाज से खास होगी कि इसमें तकनीक, आधुनिक हथियारों और सांस्कृतिक झांकियों के साथ-साथ सेना की जीवंत विरासत और मानवीय-पशु सहयोग की अनोखी तस्वीर भी देखने को मिलेगी।
कुल मिलाकर, कर्तव्य पथ पर होने वाली यह परेड देश की सैन्य शक्ति, अनुशासन और विविधता का भव्य प्रदर्शन होगी, जहां ‘मूक योद्धा’ अपने अदम्य साहस और सेवा भावना से राष्ट्र को सलामी देंगे।




