महाराष्ट्र के यवतमाल जिले की शेंदुरसनी ग्राम पंचायत से सामने आया मामला प्रशासन के लिए चौंकाने वाला बन गया है। जिस गांव की कुल आबादी महज 1300 से 1500 के आसपास है, वहां सरकारी रिकॉर्ड में लगभग 27 हजार जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र दर्ज पाए गए हैं। यह आंकड़ा न सिर्फ गांव की वास्तविक जनसंख्या से कई गुना अधिक है, बल्कि सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) में दर्ज यह असामान्य डेटा सामने आने के बाद पूरे मामले में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और संभावित फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि केवल कुछ महीनों के भीतर हजारों की संख्या में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए गए, जो किसी भी स्थिति में संभव नहीं माने जा सकते। इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। SIT में साइबर अपराध, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं, जिन्हें तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ग्राम पंचायत के लॉगिन और डिजिटल सिस्टम का दुरुपयोग कैसे हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
जांच के दौरान यह भी संकेत मिले हैं कि ग्राम पंचायत की आईडी का इस्तेमाल किसी अन्य स्थान से किया गया हो सकता है, जिससे साइबर फ्रॉड की आशंका और गहरी हो गई है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। सरकार का कहना है कि यह केवल एक गांव तक सीमित मामला नहीं हो सकता, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली की खामियों को उजागर करने वाला गंभीर प्रकरण है। SIT की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सिस्टम को और मजबूत करने के कदम उठाए जाएंगे।




