कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रहे हैं। वे जल्द ही कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री बन जाएंगे और इस मामले में दिवंगत डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। सिद्धारमैया ने पहली बार 2013 से 2018 तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था और मई 2023 में दूसरी बार उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली। दोनों कार्यकालों को मिलाकर उनका कुल समय अब तक के किसी भी मुख्यमंत्री से अधिक होने जा रहा है, जिसे कांग्रेस और उनके समर्थक एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि यह सब जनता के विश्वास और समर्थन की वजह से संभव हो पाया है। उन्होंने माना कि राजनीति में रिकॉर्ड बनते और टूटते रहते हैं और एक दिन उनका रिकॉर्ड भी कोई और तोड़ेगा, लेकिन यह क्षण उनके जीवन और राजनीतिक सफर का यादगार पड़ाव है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में रहते हुए उनका उद्देश्य हमेशा सामाजिक न्याय, गरीबों और पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा करना रहा है।
उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी.के. शिवकुमार ने सिद्धारमैया को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। शिवकुमार ने इसे पार्टी और राज्य के लिए खुशी का समय बताया और कहा कि हर नेता के जीवन में ऐसे क्षण आते हैं, जो उसके संघर्ष और मेहनत को सार्थक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सिद्धारमैया का नाम कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
हालांकि, राजनीतिक गलियारों में दोनों नेताओं के बीच नेतृत्व को लेकर चर्चाएं और मतभेद भी सामने आते रहे हैं, लेकिन इस रिकॉर्ड के मौके पर शिवकुमार का बयान एकजुटता और सम्मान का संकेत माना जा रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह है और वे इसे राज्य में पार्टी की स्थिरता और मजबूती का प्रतीक मान रहे हैं।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस रिकॉर्ड पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि सिर्फ लंबे समय तक सत्ता में रहना ही उपलब्धि नहीं है, बल्कि शासन की गुणवत्ता और जनकल्याणकारी फैसले ज्यादा अहम होते हैं। इसके बावजूद, सिद्धारमैया का यह रिकॉर्ड कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है।




